
Rama Devi Sahu
9 hours ago
मथुरा-वृंदावन की पावन भूमि पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की दिव्य लीलाएं युगों-युगों से श्रद्धालुओं के दिलों में बसी हैं। गर्ग संहिता, ब्रज परमानंद सागर और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, राधा रानी के प्राकट्य और उनके बाल रूप से जुड़ी कई ऐसी अद्भुत कथाएं हैं, जो आज भी भक्तों को भावविभोर कर देती हैं। पौराणिक मान्यताओं और ब्रज के विद्वानों के अनुसार, राधा रानी अपने कन्हैया से लगभग 11.5 (साढ़े ग्यारह) महीने बड़ी थीं। राधा रानी का प्राकट्य स्थल बरसाना नहीं, बल्कि रावल गांव माना जाता है। राजा वृषभानु जब यमुना नदी में स्नान कर रहे थे, तब उन्हें एक दिव्य कमल पुष्प पर बाल रूप में राधा रानी प्राप्त हुई थीं। रावल गांव स्थित मंदिर परिसर की छत और गुंबद पर एक अत्यंत चमत्कारिक वृक्ष स्थित है, जो श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। मंदिर की गुंबद पर उगा यह पेड़ पिछले 5250 साल से बिना किसी स्पष्ट जड़ के जीवित और पूरे 12 महीने हरा-भरा रहता है। भक्त इसे 'मन्नत का पेड़' मानते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए धागा बांधते हैं और मन्नत पूरी होने पर उसे खोलने वापस आते हैं।

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