
Rama Devi Sahu
51 days ago
हे माँ लक्ष्मी! सांसारिक सुख और धन-संपत्ति पाने की इच्छा में हम कभी भी अपने धर्म (कर्तव्य और मानवता) के मार्ग से न भटकें। हे माता! हमें ऐसी सद्बुद्धि (मति) प्रदान करें कि हम जीवन भर केवल अच्छे और नेक कार्य ही करते रहें। 1. धन और धर्म का संतुलन: अक्सर इंसान धन कमाने की होड़ में यह भूल जाता है कि क्या सही है और क्या गलत। लोभ के कारण व्यक्ति अक्सर नीति और नैतिकता को त्याग देता है। यह दोहा माता लक्ष्मी से प्रार्थना करता है कि धन तो आए, पर वह अधर्म के रास्ते से न आए। 2. सद्बुद्धि की प्रार्थना (मति): हिंदू दर्शन में लक्ष्मी जी को केवल धन की देवी नहीं, बल्कि 'श्री' कहा गया है, जो ऐश्वर्य और बुद्धि का मिश्रण है। यदि धन हो और बुद्धि भ्रष्ट हो जाए, तो वह धन विनाश लाता है। इसलिए यहाँ 'मति' (बुद्धि) की माँग की गई है ताकि धन का उपयोग सही दिशा में हो सके। 3. शुभ कर्म की प्रधानता: अंत में जीवन की सार्थकता कर्मों से होती है। लक्ष्मी जी की सच्ची कृपा वही है जो मनुष्य को परोपकारी और नेक बनाए। धन केवल साधन है, साध्य तो 'शुभ कर्म' ही होने चाहिए। यह दोहा एक साधक की सात्विक इच्छा को दर्शाता है कि उसे समृद्धि तो मिले, लेकिन उसके संस्कार और धर्म हमेशा अडिग रहें।
Comments (4)

Rama Devi Sahu
Jul 10, 2026
🙏🌹 Jai Maa Lakshmi 🌹🙏

Radhe 🌹
Jul 10, 2026
𝕛𝕒𝕚 𝕞𝕒𝕒 laxmi🌹🙏🏻🌹

Rama Devi Sahu
Jul 10, 2026
जय माँ लक्ष्मी माँ लक्ष्मी सभी पर धन, सुख और समृद्धि की कृपा बनाए रखें। उनकी कृपा से जीवन में शांति और सकारात्मकता आती है। हर घर में खुशहाली और सद्भाव बना रहे। जय माँ लक्ष्मी, हमें सदैव सही मार्ग दिखाएं।

सविता
Jul 10, 2026
शुक्रवार का पावन दिन आया है,खुशियों की सौगात अपने साथ लाया है।माँ लक्ष्मी की कृपा बरसे आप पर इतनी,कि हर लम्हा आपकी जिंदगी में मुस्कुराया है।शुभ शुक्रवार!
