
Rama Devi Sahu
16 days ago
काली लक्ष्मी सरसती, तीनों शक्ति प्रमान। शरण परे के राखिए, मात देहु वरदान॥ अर्थ: यह दोहा सनातन धर्म की तीन प्रमुख देवियों—माता काली (शक्ति/साहस), माता लक्ष्मी (धन/वैभव) और माता सरस्वती (ज्ञान/बुद्धि)—को नमन करता है। इसमें कहा गया है कि ये तीनों देवियां ही परम शक्ति का साक्षात प्रमाण (रूप) हैं। हे माता! जो भी आपकी शरण में आता है, आप उसकी रक्षा करती हैं, मुझे भी अपनी शरण में रखकर मनोवांछित वरदान प्रदान करें। भावार्थ: त्रिदेवियों की एकता: यह पंक्तियां बताती हैं कि जीवन को संपूर्ण बनाने के लिए साहस (काली), समृद्धि (लक्ष्मी) और विवेक (सरस्वती) तीनों की समान आवश्यकता है।पूर्ण समर्पण: भक्त स्वयं को पूरी तरह से दैवीय शक्ति के चरणों में सौंप देता है। वह मानता है कि बिना अहंकार के शरण में जाने पर ही सच्ची कृपा मिलती है।भय का नाश और कल्याण: मां अपने बच्चों को हर संकट से बचाती हैं। वे न केवल भौतिक सुख देती हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का वरदान भी देती हैं। भक्ति संदेश"जीवन में सफलता और शांति के लिए केवल धन ही काफी नहीं है। लक्ष्मी जी से समृद्धि, सरस्वती जी से सद्बुद्धि और काली जी से बुराइयों से लड़ने की शक्ति एक साथ मांगें। जब जीवन में ज्ञान, धन और साहस का संतुलन होगा, तब मां की कृपा से हर संकट दूर हो जाएगा।" 🔱!!जय माँ काली!! 🌹लक्ष्मी!! 🌻सरस्वती!!🙏

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