
Rama Devi Sahu
16 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 14 अगस्त 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वितीया शाम 06:46 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी 15 अगस्त प्रातः 03:42 तक तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी* *⛅योग - परिघ सुबह 09:28 तक तत्पश्चात् शिव* *⛅राहुकाल - सुबह 10:54 से दोपहर 12:31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:03* *⛅सूर्यास्त - 07:00 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:34 से प्रातः 05:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - चन्द्र दर्शन* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* 💓💓🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹 *🌿 सत्संग अमृत 🌷* ----------------------- *💥1. ब्रह्मा जी भी संसार को ठीक ठाक करके सुखी होना चाहें तो दु:खी होना पड़ेगा.* *💥2. संयोगजन्य सुख से सुखी होना चाहते तो दु:खी ही है.* *💥3. संसार की उथल-पाथल ठीक करके सुखी हो जायेंगे तो वो अपनी तबाही* *💥4. संसार विश्वास और उपभोग करने जैसा नहीं है. उपयोग करके....* *💥5. भूलकर भी उन खुशियों से मत खेलो, जिनके पीछे हो ग़म की कतारें...* *💥6. संयोगजन्य सुख, विषय-विकारों का सुख अथवा ऐसा वैसा करके सुख रावण जैसी दुर्गति होती है.* *💥7. गुरु के आदेश अनुसार अपने स्वरुप को जान लेता, चाहे उसकी भयंकर बदनामी हो – दु:खी नहीं होता.* *💥8. जिसने अपने आप में सुखी रहने की गुरु कृपा पचा ली है. सारा संसार उसके खिलाफ होकर खड़ा हो जाये – दु:खी नहीं कर सकता.* *💥9. संसार विश्वास करने योग्य नहीं, सेवा करने योग्य है.* *💥10. वाहवाही का भोग योगभ्रष्ट कर देगा, ज्ञानभ्रष्ट कर देगा.* *💥11. ऐसा कोई सुख भोग नहीं, जिनके पीछे दुःख भय रोग नहीं ।* *💥12. संयम से, सदाचार से ब्रह्म-नाडी मजबूत करके ब्रह्मज्ञान पा ले । फिर चाहे संसार पूजे चाहे कुछ करे फर्क नहीं पड़ता.* *💥13. जितना हो सके अंतर की शुद्धि के लिए संसार की सेवा करके कर्म को योग बना लो, भक्ति को योग बना लो, सुने हुए ज्ञान को आचरण में लाकर ज्ञान को योग बना लो.* *💥14. तो संसार आसक्ति करने लायक नहीं है, विश्वास करने लायक नहीं है. विश्वास तो परमात्मा पर ही करो.* *💥15. भगवान् के रास्ते चलने वाला कभी ये न सोचे की हम अयोग्य हैं.* *💥16. जो हुआ अच्छा हुआ...* *💥17. कैसी भी परिस्थिति आई, सब बीत जाएगी, समय बीत जायेगा, आपका काम बना लो.* *💥18. अपना अंतरात्मा/ परमात्मा ही विश्वास करने योग्य है.* *💥19. खाली अपने को दृष्टा, साक्षी मानकर बैठ गये वो पर्याप्त नहीं है, वासुदेव सर्वमिति.* *💥20. अपने को दृष्टा, संसार को दृश्य मानकर बैठ गये ये अधूरी यात्रा है.* *💥21. अपनी एकांत कुटिया में ईश्वर के, गुरु के साथ...* *💥22. मन को इन्द्रियों की तरफ जाने से रोकने वाली बुद्धि बना लो.* *💥23. गुरु भी अमंगल नाश कर देते हैं.* *💥24. और दृढ़ता से लगे रहो – भजन्ते माम् दृढ व्रता.* *💥25. सुख अपने अंतरात्मा में / अपने आप में है.* *💥26. आत्मदेव के सुख के आगे सुविधा का सुख क्या मायने रखता है.* *💥27. हमारे व्यवहार से गुरुदेव प्रसन्न रहे ये शिष्य का कर्त्तव्य है.* *💥28. कोई भी चाह न करो. सभी चाहों को भागने के लिए ईश्वर-प्राप्ति की चाह करो.* *💥संसार विश्वास करने योग्य नहीं है, सेवा करने योग्य है । विश्वास करने योग्य तो परमेश्वर है, वेद वाणी है, गुरु वाणी है ।* *💥ऋषि प्रसाद लोक कल्याण की सेवा करने वाले संसार से सुख पाने के लिए सेवा नहीं करते, दूसरों का हित कैसे हो, बुद्धि कैसे बढ़े, मंगल कैसे हो इस भाव से सेवा करते हैं ।* *💥संसार से सुख लेने की इच्छा की तो दुःखों की कतार खड़ी है ।* *💥सुख अंतरात्मा में है, अपने आपमें है ।* *💥गुरु नाराज हों और शिष्य मौज में रहे, मौज से खाये-पिये तो शिष्य की तबाही है । हमारे व्यवहार से गुरु सदा प्रसन्न रहें यही शिष्य का कर्तव्य है ।* *💥वाहवाही से सुखी होने लगेगा तो योगभ्रष्ट हो जायेगा ।* *💥मुझे इस बात का संतोष है कि हमारे से जो दीक्षित हैं वे बड़ी समझदारी से जी रहे हैं ।* *💥संयोगजन्य सुख से ब्रह्माजी भी सुखी होना चाहें तो नहीं हो सकते । ब्रह्माजी ऐसा करते भी नहीं । वे तो ब्रह्म में पहले स्थित होकर फिर सृष्टि-रचना करते हैं ।* *💥मैं आत्मा हूँ, साक्षी हूँ और संसार मिथ्या है’ - यहाँ तक भी पहुँच गये तो साधन
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 14, 2026
🙏‼️ Jai Shree Shyam ‼️🙏 Suprabhat Ji 🌹❤️

Rakesh Kumar
Aug 14, 2026
good morning ji 🙏
