
Rama Devi Sahu
161 days ago
पौराणिक कथा के अनुसार केदारनाथ की कहानी…… पौराणिक कथा के अनुसार केदारनाथ की कहानी में महाभारत के युद्ध में पांडवों ने अपने गोत्र (कौरवों) भाइयों की हत्या कर दी थी। पांडव इस भ्रातू हत्या के पाप से मुक्त होना चाहते थे। इसलिए वे भगवान शिव के दर्शन चाहते थे। परंतु भगवान शिव पांडवों से बहुत नाराज थे, इसलिए पांडव को दर्शन नहीं देना चाहते थे। पांडव भगवान शिव को खोजते हुए काशी तक आ पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें भगवान शिव के दर्शन नहीं हुए। भगवान शिव जाकर केदार में बस गए। लेकिन पांडवो को जैसे ही ज्ञात हुआ कि भगवान शिव केदार में है वे उनका पीछे करते-करते केदार भी पहुंच गए। भगवान शंकर का बैल रूप तभी, भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर लिया और अन्य पशुओं में जा मिले। पांडव फिर भी भगवान शिव को ढूंढते ही रहे। तुरंत ही भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया और दो पहाड़ पर फैला दिया जिसके बाद सभी पशु गाय बैल पैर के नीचे से चले गए, किंतु भगवान शिव उस पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। तभी बैल रूपी शिव धरती में समाने लगे और भीम ने बलपूर्वक बैल की पीठ पकड़ ली। भगवान शिव पांडवो की अनन्य भक्ति और दृढ़ संकल्प को देखकर उन पर प्रसन्न हो गए और उन्हें तत्काल दर्शन दिए। इस प्रकार पांडवों को उनके भाइयों की हत्या के प्राप्त से मुक्ति मिली। तभी से यह ज्योतिर्लिंग बैल के पीठ के रूप में केदारनाथ में स्थित है और अन्य ज्योतिर्लिंग से काफी अनोखा है। इस तरह यह ज्योर्तिलिंग केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हुआ। केदारनाथ की कहानी ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव बेल के रूप में अंतर्ध्यान हुए। तब उनका धड़ (शरीर का ऊपरी हिस्सा) काठमांडू में प्रकट हुआ। अब यहां पशुपतिनाथ का भव्य मंदिर स्थित है। भगवान शंकर का मुख रुद्रनाथ, नाभी महहेश्वर, जटा कल्पेश्वर और उनकी भुजाएं तुंगनाथ में प्रकट हुई। इस प्रकार चार स्थानों सहित केदारनाथ पंच केदार के नाम से भी सुप्रसिद्ध है।

Comments (1)

lalluram
Mar 24, 2026
Bahut khud
