MyMandirInstall

॥ श्रीहरिः ॥ एकान्तमें बैठकर करुणभाव और गद्गद वाणीसे भगवान् से प्रार्थना करनी चाहिये कि 'हे परमेश्वर ! मैं हृदयसे आपकी स्मृति चाहता हूँ। आपसे आपकी स्मृति बनी रहनेकी भीख माँगता हूँ।' इस प्रकार नित्य अपने-अपने भावोंके अनुसार भगवान् से कातर प्रार्थना करे। एक मिनटकी सच्ची प्रार्थनासे भी बड़ा लाभ होता है। नित्य नियमपूर्वक सत्संग करे, यदि कहीं सत्संग न मिले तो सद्गन्थोंका स्वाध्याय एवं भगवद्वाक्योंका संग करे। समय बड़ा मूल्यवान् है। मनुष्यका शरीर मिल गया, यह भगवान् की बड़ी दया है। अब भी यदि भगवत् प्राप्तिसे वंचित रह गये तो हमारे समान मूर्ख कौन होगा। हमें अपने अमूल्य समयको अमूल्य कार्यमें ही लगाना चाहिये। भगवान् की स्मृति ही अमूल्य है। इस प्रकार नित्य विचार करना चाहिये। मृत्यु न मालूम कब आ जाय, वह प्रतिक्षण हमारे सामने मुँह बाये खड़ी है! अतः जबतक निरन्तर भजन न होने लगे तबतक बड़ा खतरा है। इस प्रकार बराबर मृत्युको याद रखनेसे भी विषयोंमें वैराग्य होकर भगवत्स्मृति बनी रह सकती है।

Post media

Comments (1)

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Aug 27, 2026

जय श्री हरि विष्णु की 🚩🌹🙏