
Rama Devi Sahu
300 days ago
*तृष्णा* ======= एक व्यापारी था। वह ट्रक में चावल के बोरे लिए जा रहा था। एक बोरा खिसक कर गिर गया। कुछ चीटियां आयीं 10-20 दाने ले गयीं, कुछ चूहे आये 100-50 ग्राम खाये और चले गये, कुछ पक्षी आये थोड़ा खाकर उड़ गये, कुछ गायें आयीं 2-3 किलो खाकर चली गयीं। एक मनुष्य आया और वह पूरा बोरा ही उठा ले गया। अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य तृष्णा में जीता है। इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह सर्वाधिक दुखी है। *मूल आवश्यकतापूर्ति के बाद इच्छा को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और दुख का कारण बनेगी।✍🏻* _चौराहे पर खड़ी जिंदगी,_ _नजरें दौड़ाती है..._ 👀 _काश कोई बोर्ड दिख जाए_ _जिस पर लिखा हो..._ *सुकून 0 किलोमीटर..* 🙏🏻आपका दिन उन्नति कारक हो🙏🏻

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