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Rama Devi Sahu

188 days ago

🔱 भृंगी ऋषि– तीन पैरों वाले अद्भुत शिवभक्त 🔱 "भृंगी ऋषि" भगवान शिव के परम अनन्य भक्त माने जाते हैं। उनका जीवन शिव-भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि वे केवल भगवान शिव की ही आराधना करते थे और माता पार्वती को प्रणाम नहीं करते थे। एक बार जब भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान थे, तब भी भृंगी ऋषि ने केवल शिव की परिक्रमा करने का निश्चय किया। माता पार्वती ने उन्हें समझाया कि शिव और शक्ति अभिन्न हैं, एक के बिना दूसरा अधूरा है। परंतु भृंगी ऋषि अपने संकल्प पर अडिग रहे। तब माता ने अपने तेज से उनकी देह का रक्त और मांस भाग खींच लिया, जिससे वे केवल अस्थि-पंजर मात्र रह गए। शरीर में शक्ति न रहने से वे खड़े भी न रह सके। उनकी अटल भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें तीसरा पैर प्रदान किया, जिससे वे पुनः स्थिर होकर खड़े हो सके। इसी कारण उन्हें “तीन पैर वाले भृंगी ऋषि” कहा जाता है। उनका तीसरा पैर शिव-कृपा और अटूट भक्ति का प्रतीक है। यह कथा यह संदेश देती है कि शिव और शक्ति एक ही तत्व के दो स्वरूप हैं — शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि। अर्थात् शक्ति के बिना शिव भी स्पंदित नहीं हो सकते। भृंगी ऋषि हमें सिखाते हैं कि भक्ति दृढ़ हो, परंतु उसमें समत्व और पूर्णता का भाव भी आवश्यक है। शिव और शक्ति की संयुक्त उपासना ही जीवन में संतुलन और सिद्धि प्रदान करती है। 🙏🌷🔔 हर हर महादेव 🔔🌷🙏

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Feb 23, 2026

🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱 Om Namah Shivay 🔱🙏 Suprabhat Jii 🌹🌹