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*चातुर्मास - साधना, संयम और शुद्धि का काल 🕉* देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास तक चलने वाला चातुर्मास सनातन संस्कृति में तप, व्रत, उपवास और आत्मशुद्धि का विशेष काल माना गया है. यह काल वर्षा ऋतु का होता है, जब संत-महात्मा एक स्थान पर रुककर साधना करते हैं और जनसामान्य को धर्मोपदेश देते हैं. चातुर्मास में आहार, आचरण और विचारों में संयम की परंपरा है, जो शरीर एवं मन दोनों की शुद्धि में सहायक होती है. वैज्ञानिक दृष्टि से यह काल पाचन तंत्र की शिथिलता का होता है, अतः व्रत-उपवास और सात्विकता स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं. सनातन संस्कृति की यह परंपरा ऋतु, प्रकृति और अध्यात्म के संतुलन की गूढ़ समझ को दर्शाती है. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

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