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Rama Devi Sahu

89 days ago

यह प्रसिद्ध पंक्ति संत कबीरदास जी के दोहे का एक हिस्सा है, जिसका अर्थ है कि असली अमीर या धनवान वही व्यक्ति है जिसके पास प्रभु की भक्ति रूपी 'राम नाम का धन' है। कबीर जी कहते हैं: "कबिरा सब जग निर्धना, धनवंता न कोय।धनवंता सोइ जानिये, राम नाम धन होय।। इस दोहे का पूरा भाव यह है कि सांसारिक धन, जैसे सोना-चांदी और संपत्ति, कभी साथ नहीं देते और असली धन तो प्रभु का नाम ही है इनके बिना हर कोई असल में गरीब है। असली और स्थायी संपत्ति भगवान का नाम और उनकी भक्ति ही है।

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