MyMandirInstall
Profile

Saumya Sharma

8 hours ago

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹🙏 भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस देश के दूसरे राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस का इतिहास और कारण जन्मदिन: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। छात्रों का अनुरोध: वर्ष 1962 में जब वे भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। विशेष सुझाव: डॉ. राधाकृष्णन ने कहा कि उनके जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय यदि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए, तो यह उनके लिए ज्यादा गर्व की बात होगी। शुरुआत: साल 1962 से ही हर साल 5 सितंबर को देश भर में शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा। इस दिन का महत्व यह दिन समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान को याद करने का अवसर है। डॉ. राधाकृष्णन शिक्षा और अध्यापन के प्रति बेहद समर्पित थे और वे मानते थे कि "सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें खुद के बारे में सोचना सिखाते हैं।"

Post media

Comments (15)

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2026

जय श्री राधे कृष्ण बहना जी 🙏 शुभ रात्रि विश्राम 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2026

शिक्षक दिवस की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएं भाई जी 🙏🌹☺️ शुभ रात्रि विश्राम 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2026

शुभ रात्रि विश्राम मेरी प्यारी दी 🙏 ठाकुर जी की कृपा से आपकी रात्रि सुखद सुकून भरी हो 🙏 आने वाला दिन आपके लिए शुभ फलदाई व मंगलमय रहे 🙏🌹☺️

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2026

बहुत ही सुन्दर comment के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दी 🙏 सही बात है भगवान के पास किसी चीज की कमी थोड़े ही है, जो उन्हें प्रसन्न करे। भगवान तो अपने भक्त के भाव के भूखे हैं 🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Sep 5, 2026

Thankyou my dear di 🙏 and wish you same, Happy Teachers day 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2026

जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌿 शुभ रात्रि वंदन बहना जी ❤️🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2026

*भाव के भूखे है मेरे कान्हा..!!* 〰〰🌼〰〰🌼〰〰 बहुत सुंदर, बड़े भाव से पढ़े: कृष्ण भगवान का एक बहुत बड़ा भक्त हुआ लेकिन वो बेहद गरीब था। एक दिन उसने अपने शहर के सब से बड़े "गोविन्द गोधाम" की महिमा सुनी और उसका वहाँ जाने को मन उत्सुक हो गया। कुछ दिन बाद जन्माष्टमी आने वाली थी उसने सोचा मै प्रभु के साथ जन्माष्टमी "गोविन्द गोधाम" में मनाऊँगा। गोंविंद गोधाम उसके घर से बहुत दूर था। जन्माष्टमी वाले दिन वो सुबह ही घर से चल पड़ा। उसके मन में कृष्ण भगवान को देखने का उत्साह और मन में भगवान के भजन गाता जा रहा था। रास्ते में जगह जगह लंगर और पानी की सेवा हो रही थी, वो यह देखकर बहुत आनंदित हुआ की वाह प्रभु आपकी लीला ! मैने तो सिर्फ सुना ही था कि आप गरीबो पर बड़ी दया करते हो आज अपनी आँखों से देख भी लिया। सब गरीब और भिखारी और आम लोग एक ही जगह से लंगर प्रशाद पाकर कितने खुश है। भक्त ऑटो में बैठा ही देख रहा था उसने सबके देने पर भी कुछ नही लिया और सोचा पहले प्रभु के दर्शन करूँगा फिर कुछ खाऊँगा ! क्योंकि आज तो वहाँ ग़रीबो के लिये बहुत प्रशाद का इंतेज़ाम किया होगा। रास्ते में उसने भगवान के लिए थोड़े से अमरुद का प्रशाद लिया और बड़े आनंद में था भगवान के दर्शन को लेकर। भक्त इतनी कड़ी धूप में भगवान के घर पहुँच गया और मंदिर की इतनी प्यारी सजावट देखकर भावविभोर हो गया। भक्त ने फिर मंदिर के अंदर जाने का किसी से रास्ता पूछा।किसी ने उसे रास्ता बता दिया और कहा यह जो लाईने लगी हुई है आप भी उस लाइन में लग जाओ। वो भक्त भी लाईन में लग गया वहाँ बहुत ही भीड़ थी पर एक और लाइन उसके साथ ही थी पर वो एकदम खाली थी। भक्त को बड़ी हैरानी हुई की यहाँ इतनी भीड़ और यहाँ तो बारी ही नही आ रही और वो लाइन से लोग जल्दी जल्दी दर्शन करने जा रहे है। उस भक्त से रहा न गया उसने अपने साथ वाले भक्त से पूछा की भैया यहाँ इतनी भीड़ और वो लाइन इतनी खाली क्यों है और वहाँ सब जल्दी जल्दी दर्शन के लिए कैसे जा रहे है वो तो हमारे से काफी बाद में आए है। उस दूसरे भक्त ने कहा भाई यह VIP लाइन है जिसमे शहर के अमीर लोग है। भक्त की सुनते ही आँखे खुली रह गई उसने मन में सोचा भगवान के दर पे क्या अमीर क्या गरीब यहाँ तो सब समान होते है। कितनी देर भूखे प्यासे रहकर उस भक्त की बारी दरबार में आ ही गई और भगवान को वो दूर से देख रहा था और उनकी छवि को देखकर बहुत आनंदित हो रहा था। वो देख रहा था की भगवान को तो सब लोग यहाँ छप्पन भोग चढ़ा रहे है और वो अपने थोड़े से अमरुद सब से छुपा रहा था। जब दर्शन की बारी आई तो सेवादारो ने उसे ठीक से दर्शन भी नही करने दिए और जल्दी चलो जल्दी चलो कहने लगे। उसकी आँखे भर आई और उसने चुपके से अपने वो अमरुद वहाँ रख दिए और दरबार से बाहर चला गया। दरबार के बाहर ही लंगर प्रशाद लिखा हुआ था। भक्त को बहुत भूख लगी थी सोचा अब प्रशाद ग्रहण कर लू । जेसे ही वो लंगर हाल के गेट पर पहुँचा तो 2 दरबान खड़े थे वहाँ उन्होंने उस भक्त को रोका और कहा पहले VIP पास दिखाओ फिर अंदर जा सकोगे। भक्त ने कहाँ यह VIP पास क्या होता है मेरे पास तो नही है। उस दरबान ने कहा की यहाँ जो अमीर लोग दान करते है उनको पास मिलता है और लंगर सिर्फ वो ही यहाँ खा सकते हैं। भक्त की आँखों में इतने आँसू आ गए और वो फूट फूट कर रोने लगा और भगवान से नाराज़ हो गया और अपने घर वापिस जाने लगा। रास्ते में वो भगवान से मन में बातें करता रहा और उसने कहा प्रभु आप भी अमीरों की तरफ हो गए आप भी बदल गए प्रभु मुझे आप से तो यह आशा न थी और सोचते सोचते सारे रास्ते रोता रहा। भक्त घर पर पहुँच कर रोता रोता सो गया। भक्त को भगवान् ने नींद में दर्शन दिए और भक्त से कहा तुम नाराज़ मत होओ मेरे प्यारे भक्त भगवान ने कहा अमीर लोग तो सिर्फ मेरी मूर्ति के दर्शन करते है।अपने साक्षात् दर्शन तो मै तुम जैसे भक्तों को देता हूँ ... और मुझे छप्पन भोग से कुछ भी लेंना देंना नही है मै तो भक्त के भाव खाता हूँ और उनके आँसू पी लेता हूँ और यह देख मै तेरे भाव से चढ़ाए हुए अमरुद खा रहा हूँ। भक्त का सारा संदेह दूर हुआ और वो भगवान के साक्षात् दर्शन पाकर गदगद हो गया और उसका गोविंद गोधाम जाना सफल हुआ और भगवान को खुद उसके घर चल कर आना पड़ा। भगवान भाव के भूखे है बिन भाव के उनके आगे चढ़ाए छप्पन भोग भी फीके है..!! *🙏🏻🙏🙏🏾जय श्री कृष्ण*🙏🏽🙏🏼🙏🏿

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 5, 2026

Happy Teacher's Day To All Friends 🙏🙏 ,,गुरु से पाया हमने ज्ञान गुरु की महिमा बड़ी महान कैसे बांधू उन गुरुओं को एक दिन में जिन्होंने मेरा पूरा जीवन दिया संवार प्रथम गुरु होती है माता अच्छे बुरे का ज्ञान जिससे हर कोई पाता बच्चों के लिए खुद को देती भुला मां से बेहतर कौन भला द्वितीय गुरु हैं पिता हमारे जिसने संतान के भविष्य संवारे खुद जल कर बच्चों को रोशन करते पिता ही जीवन में उजियारा भरते तृतीय गुरु परम पिता परमेश्वर जो है कण कण में व्यापक सुख दुख दोनों का पाठ पढ़ाते ईश्वर ही मिट्टी को सोना बनाते चतुर्थ गुरु वो शिक्षक हमारे हमारे भविष्य की नींव के सहारे असल जीवन का जो देते ज्ञान शिक्षक होते जग में महान पंचम गुरु ये दुनिया सारी ये भी तो है शिक्षक हमारी नित नया सबक हमे पढ़ाती कभी गिराती कभी उठाती अन्तिम गुरु ये जिंदगी हमारी होती जो सबको ही प्यारी हमसे नित नए जो खेल खेलती कभी हंसाती कभी है रुलाती शिक्षक दिवस के इस शुभ अवसर पर सभी शिक्षकों को मेरा प्रणाम 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

Sanjay  Ahlawat

Sanjay Ahlawat

Sep 5, 2026

आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएं 💐