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Rama Devi Sahu

108 days ago

जय राम जी 🙏 ॐ गं गणपतए नमो नमः श्री सिद्धिविनायक नमो नमः अष्टविनायक नमो नमः गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मौरया 🙏🌹🙏

Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 24, 2026

"शिव-गौरी के लाड़ले, जग के पालनहार। विघ्न हरे, दें संपदा, श्री गणपति दातार॥" शिव-गौरी के लाड़ले: आप भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) के अत्यंत प्रिय और लाडले पुत्र हैं। जग के पालनहार: आप पूरे संसार का ध्यान रखने वाले, सबका मंगल करने वाले और जगत के पालनकर्ता हैं। विघ्न हरे: आप अपने भक्तों के जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं, संकटों और विघ्नों को दूर करने वाले (विघ्नहर्ता) हैं। दें संपदा: आप जीवन में सुख, समृद्धि, बुद्धि और धन-दौलत का वरदान देने वाले हैं। श्री गणपति दातार: हे सर्वशक्तिमान और दयालु दाता (देने वाले) श्री गणेश जी! आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। संक्षेप में: इस दोहे में भगवान गणेश जी की स्तुति की गई है। इसमें कहा गया है कि माता पार्वती और शिव जी के प्रिय पुत्र श्री गणेश पूरे संसार के रक्षक हैं, जो अपने भक्तों के सारे कष्टों को हर लेते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि तथा रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं।

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 24, 2026

"शिव-गौरी के लाड़ले, जग के पालनहार। विघ्न हरे, दें संपदा, श्री गणपति दातार॥" शिव-गौरी के लाड़ले: आप भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) के अत्यंत प्रिय और लाडले पुत्र हैं। जग के पालनहार: आप पूरे संसार का ध्यान रखने वाले, सबका मंगल करने वाले और जगत के पालनकर्ता हैं। विघ्न हरे: आप अपने भक्तों के जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं, संकटों और विघ्नों को दूर करने वाले (विघ्नहर्ता) हैं। दें संपदा: आप जीवन में सुख, समृद्धि, बुद्धि और धन-दौलत का वरदान देने वाले हैं। श्री गणपति दातार: हे सर्वशक्तिमान और दयालु दाता (देने वाले) श्री गणेश जी! आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। संक्षेप में: इस दोहे में भगवान गणेश जी की स्तुति की गई है। इसमें कहा गया है कि माता पार्वती और शिव जी के प्रिय पुत्र श्री गणेश पूरे संसार के रक्षक हैं, जो अपने भक्तों के सारे कष्टों को हर लेते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि तथा रिद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं।

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

Jun 24, 2026

🌹 ऊं श्रीं गणेशाय नमः 🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹

Jun 24, 2026

श्लोक: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा