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नई रिसर्च का दावा 'पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत एक बार नहीं, बल्कि दो बार हुई थी। सदियों से विज्ञान हमें यही सिखाता आया है कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति एक ही बिंदु से हुई थी। लेकिन क्या हो अगर यह सदियों पुरानी मान्यता पूरी तरह सच न हो? हाल ही में हुई एक नई रिसर्च ने विज्ञान जगत में खलबली मचा दी है। इस रिसर्च का दावा है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत का कोई एक सीधा रास्ता नहीं था बल्कि यह प्रक्रिया दो अलग-अलग तरीकों से,स्वतंत्र रूप से शुरू हुई थी। जर्मनी की हेनरिक हेन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'साइंस एडवांसेस' में प्रकाशित हुआ है। इस खोज ने चार्ल्स डार्विन के 'इवोल्यूशन के पेड़' को देखने के हमारे नजरिए को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया है। बैक्टीरिया और आर्किया: जीवन के दो अलग-अलग रास्ते आज से लगभग 4 अरब साल पहले जब पृथ्वी पर जीवन अपने सबसे शुरुआती रूप में पनप रहा था,तब मुख्य रूप से दो प्रकार के सूक्ष्मजीव अस्तित्व में आए,बैक्टीरिया (Bacteria) और आर्किया (Archaea)। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि इन दोनों ने अपनी जैविक प्रक्रियाएं एक ही साझा पूर्वज से हासिल की थीं। लेकिन मुख्य शोधकर्ता विलियम मार्टिन और उनकी टीम ने जब इन जीवों के अंदर होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं का गहराई से अध्ययन किया तो नतीजे चौंकाने वाले थे। टीम ने पाया कि शरीर की कोशिकाओं के अंदर रासायनिक प्रतिक्रियाओं को संभव बनाने वाले प्रोटीन,जिन्हें 'एंजाइम' कहा जाता है,बैक्टीरिया और आर्किया में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इन दोनों जीवों ने जीवन जीने का तरीका एक ही पूर्वज से विरासत में नहीं लिया बल्कि दोनों ने स्वतंत्र रूप से अपने-अपने एंजाइम और जैविक तंत्र विकसित किए यानी जीवन की जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं की शुरुआत एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग रास्तों से हुई। जब धरती पर एंजाइम नहीं थे,तब जीवन कैसे चला? इस रिसर्च ने एक और बड़े रहस्य से पर्दा उठाया है। अगर एंजाइम का विकास बैक्टीरिया और आर्किया ने बाद में अलग-अलग किया तो एकदम शुरुआत में,जब कोई एंजाइम था ही नहीं,तब जीवन कैसे पनपा? वैज्ञानिकों के अनुसार इसका जवाब गहरे समुद्र में छिपे गर्म पानी के स्रोतों हाइड्रोथर्मल वेंट्स में मिलता है। अरबों साल पहले इन वेंट्स से निकलने वाली धातुओं ने एक प्राकृतिक उत्प्रेरक का काम किया। इन धातुओं ने समुद्र में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस को मिलाकर ऐसे कार्बनिक अणु बनाए, जो जीवन के लिए बेहद जरूरी थे। शुरुआत में जीवन पूरी तरह से इन समुद्री वेंट्स की भू-रासायनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर था। लेकिन समय के साथ बैक्टीरिया और आर्किया ने इस बाहरी प्रक्रिया को अपने शरीर के अंदर करने का तरीका खोज निकाला। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने यह तरीका बिल्कुल अलग-अलग खोजा जिससे उनके एंजाइम भी अलग-अलग बने। विज्ञान की दुनिया में क्यों मची है सनसनी? यह खोज इसलिए क्रांतिकारी है क्योंकि यह सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी को और भी स्पष्ट करती है। यह बताती है कि कैसे निर्जीव रसायनों ने सजीव बनने का सफर तय किया। * इवोल्यूशन का नया मॉडल: अब तक हम विकासवाद को एक पेड़ की तरह मानते थे जिसका एक मुख्य तना है और उससे कई शाखाएं निकली हैं। लेकिन यह रिसर्च बताती है कि जीवन का पेड़ बिल्कुल जड़ से ही दो अलग-अलग तनों में बंट गया था। * ब्रह्मांड में जीवन की तलाश: यह खोज न केवल पृथ्वी के इतिहास को समझने में मदद करती है बल्कि ब्रह्मांड के अन्य ग्रहों पर जीवन की तलाश करने वाले एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट्स को भी नई दिशा देती है। अगर जीवन एक ही ग्रह पर दो अलग-अलग रास्तों से शुरू हो सकता है तो ब्रह्मांड के किसी और कोने में जीवन के पनपने की संभावनाएं कहीं अधिक हो सकती हैं।

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