
Rama Devi Sahu
171 days ago
भगवान विष्णु की कृपा से आपको अपने हर कार्य में सफलता मिले और आपका मन हमेशा धर्म के मार्ग पर बना रहे। एक समय की बात है, असुरों के राजा बलि बहुत शक्तिशाली और दानी थे। उन्होंने अपनी शक्ति से स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास गए। एक छोटे ब्राह्मण का आगमन राजा बलि एक महान यज्ञ कर रहे थे। तभी वहाँ एक नन्हा सा ब्राह्मण बालक (वामन) पहुँचा, जिसके हाथ में एक छाता और कमंडल था। राजा बलि ने मुस्कुराकर कहा, "हे नन्हे ब्राह्मण! आप जो चाहें माँग लें, मैं आपको खाली हाथ नहीं जाने दूँगा।" उनके गुरु शुक्राचार्य समझ गए कि यह साक्षात भगवान विष्णु हैं, उन्होंने बलि को रोकने की कोशिश की, लेकिन बलि अपने वचन पर अडिग रहे। तीन कदम जमीन वामन देव ने शांत स्वर में कहा, "राजन्, मुझे केवल तीन कदम भूमि चाहिए, जो मैं अपने पैरों से नाप सकूँ।" बलि हँस पड़े और बोले, "बस इतना ही? ठीक है, आप तीन कदम भूमि ले लीजिए।" विशाल रूप (विश्वरूप) जैसे ही बलि ने जल छोड़कर संकल्प लिया, वामन देव का आकार बढ़ने लगा। वे इतने विशाल हो गए कि: पहले कदम में उन्होंने पूरी धरती नाप ली। दूसरे कदम में उन्होंने पूरा आकाश और स्वर्ग नाप लिया। अब तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची। भगवान ने पूछा, "बलि! अब तीसरा कदम कहाँ रखूँ?" समर्पण की पराकाष्ठा राजा बलि समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं है। उन्होंने अपना अहंकार त्याग दिया और हाथ जोड़कर अपना सिर झुका दिया। उन्होंने कहा, "प्रभु, तीसरा कदम मेरे सिर पर रख दीजिए।" भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि के सिर पर पैर रखा और उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही, उनकी भक्ति से खुश होकर भगवान ने वचन दिया कि वे स्वयं उनके महल के द्वारपाल बनकर उनकी रक्षा करेंगे।

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