
Rama Devi Sahu
133 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 19 अप्रैल 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - द्वितीया सुबह 10:49 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - भरणी सुबह 07:10 तक, तत्पश्चात् कृत्तिका प्रातः 04:35 अप्रैल 20 तक, तत्पश्चात् रोहिणी* *⛅योग - आयुष्मान रात्रि 08:02 तक तत्पश्चात् सौभाग्य* *⛅राहुकाल - शाम 05:14 से शाम 06:49 से तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:03* *⛅सूर्यास्त - 06:49 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:33 से प्रातः 05:18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:01 से दोपहर 12:52 (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:03 से मध्यरात्रि 12:48 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - त्रेता युगादि तिथि, अक्षय तृतीया, त्रिपुष्कर योग, परशुरामजी का प्राकट्य दिवस* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है एवं तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹गर्मी के प्रभाव से सुरक्षा हेतु – प्रकृति के उपहार🔹* *🥥नारियल पानी :- नारियल का पानी पित्तशामक, स्वादिष्ट, स्निग्ध और ताजगी प्रदान करनेवाला है । यह प्यास को शांत कर ग्रीष्म ऋतु की उष्णता से सुरक्षा करता है । अत: गर्मियों में नारियल पानी का सेवन विशेष लाभदायी है ।* *🔸लू लगने पर नारियल पानी के साथ काला जीरा पीस के शरीर पर लेप करने से लाभ होता है ।* *🔸प्रतिदिन नारियल खाने व नारियल पानी पीने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है, वीर्य की तेजी से वृद्धि होती है । ( अष्टमी को नारियल न खायें । )* *🔸मूत्र में जलन होने पर पिसा हरा धनिया तथा मिश्री नारियल पानी में मिला के पीने से जलन दूर होती है ।* *🥒खीरा : - खीरा शरीर को शीतलता प्रदान करता है । इसमें बड़ी मात्रा में पानी और खनिज तत्त्व पाये जाते हैं ।* *अत: इसके सेवन से शरीर में खनिज तत्त्वों का संतुलन बना रहता हैं । यह मूत्र की जलन शांत करता है एवं यकृत ( लीवर ) के लिए भी हितकारी है । खीरा भूख बढाने के साथ ही आँतों को सक्रिय करता हैं ।* *🔸अधिक पढने – लिखने, चित्रकला, संगणक व सिलाई का काम करने से आँखों में थकावट होने पर खीरे के दुकड़े काटकर आँखों पर रखें । इससे उनको आराम मिलता है तथा थकावट दूर होती है ।* *🍋नींबू और खीरे 🥒 का रस मिलाकर लगाने से धूप से झुलसी हुई त्वचा ठीक होती है ।* *🍉तरबूज :- ग्रीष्म ऋतुमें प्यास की अधिकता से मुक्ति दिलाता है तरबूज । इसके सेवन से शरीर में लू का प्रकोप कम होता है और बेचैनी से रक्षा होती है ।* *तरबूज के रस में सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर पीने से लू से सुरक्षा होती है ।* *🔸गर्मी के प्रकोप से मूत्रावरोध होने पर तरबूज का रस पिलाने से मूत्र शीघ्र निष्कासित होता है ।* *🔸तरबूज के छोटे – छोटे टुकड़ों पर थोडा – सा जीरा चूर्ण और मिश्री डाल के सेवन करने से शरीर की उष्णता दूर होती है ।* *☘️धनिया : - धनिया ग्रीष्म ऋतू में अधिक प्यास के प्रकोप को शांत करता है ।* *🔸१० ग्राम सूखा धनिया व ५ ग्राम आँवला चूर्ण रात को मिटटी के पात्र में १ गिलास पानी में भिगो दें । प्रात: मसलकर मिश्री मिला के छान के पियें । यह गर्मी के कारण होनेवाले सिरदर्द व मूँह के छालों में हितकर हैं । धनिया पीसकर सिर पर लेप करने से भी आशातीत लाभ होगा । इससे पेशाब की जलन, गर्मी के कारण चक्कर आना तथा उलटी होना आदि समस्याएँ दूर होती हैं ।*
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