
Annuraj 🥀🥀 Anita 😊
240 days ago
वृन्दावन… केवल एक स्थान नहीं, यह तो वह धाम है जहाँ अहंकार गल जाता है, विद्या मौन हो जाती है और भक्ति अपने चरम पर पहुँच जाती है। इसी पावन ब्रजभूमि पर एक बार वह महापुरुष आए, जिनके शब्दों में राम स्वयं बोलते हैं—गोस्वामी तुलसीदास जी। कहते हैं, तुलसीदास जी वृन्दावन में ठहरे हुए थे। भंडारों में उनकी विशेष रुचि नहीं थी, पर जब महादेव की भीतर से प्रेरणा मिली, तो वे संत नाभा जी के भंडारे की ओर चल पड़े। समय कुछ विलंब का हो गया। जब वे पहुँचे, तो संतों की अपार भीड़ थी। कहीं बैठने की जगह नहीं मिली। तब गोस्वामी जी ने वही स्थान चुना जहाँ संतों की पनहियाँ, जूते-चप्पल रखे थे। वहीं बैठ गए। जिसे संसार तुच्छ समझे, वही तुलसी के लिए तीर्थ बन गया। भंडारा खीर का था—क्योंकि वृन्दावन के ठाकुर को खीर अत्यंत प्रिय है। सब संत अपने-अपने पात्र लेकर आए थे। गोस्वामी जी के पास कोई पात्र नहीं था। परोसने वाला आया और बोला— “बाबा, तुम्हारा पात्र कहाँ है? बिना बर्तन खीर कैसे दूँ?” तुलसीदास जी मुस्कराए। पास ही एक संत की पनहिया रखी थी। उन्होंने उसे आगे कर दिया और कहा—“इसी में खीर डाल दो।” सभा में हलचल मच गई। परोसने वाला क्रोधित हो उठा। कटु वचन कहने लगा। तभी संत नाभा जी भी आ पहुँचे। तुलसीदास जी की आँखों से अश्रु बहने लगे। उन्होंने अत्यंत दीन स्वर में कहा—“यह जूता किसी संत का है… और वह भी वृन्दावन के रसिक संत का। इसमें ब्रजरज लगी है। जब यह रज खीर के साथ मेरे भीतर जाएगी, तो मेरा अंतःकरण पवित्र हो जाएगा।” बस… इतना सुनते ही समस्त संत मंडली स्तब्ध रह गई। जिन चरणों पर लोग गिरते हैं, वे चरण आज जूतों के पास बैठे थे। सब संत उठकर तुलसीदास जी के चरणों में गिर पड़े। परोसने वाले ने शत-शत बार क्षमा माँगी। यह था तुलसीदास जी का दैन्य—जहाँ महानता स्वयं को सबसे छोटा मान लेने में है। धन्य है वृन्दावन… धन्य है वह रज… जहाँ राधारानी और कृष्ण के चरण पड़े। वृन्दावन में प्रवेश कोई संयोग नहीं, यह राधा की कृपा का आमंत्रण होता है। तुलसीदास जी जानते थे—राम और कृष्ण में कोई भेद नहीं। पर वृन्दावन में हर ओर एक ही स्वर गूँजता था—“राधे-राधे।” कहीं “राम-राम” सुनाई नहीं देता था। उस क्षण तुलसी के हृदय से जो भाव निकला, वह आज भी अमर है— वृन्दावन ब्रजभूमि में कहाँ राम सों बेर, राधा राधा रटत हैं आक ढ़ाक अरू खैर। फिर वह दिव्य क्षण आया। जब तुलसीदास जी मदनमोहन जी के दर्शन कर रहे थे। एक पुजारी के व्यंग्य ने वातावरण को कठोर बना दिया। तुलसीदास जी ने हाथ जोड़कर प्रभु से कहा—“हे ठाकुर! मैं जानता हूँ आप ही राम हैं, आप ही कृष्ण हैं। पर आज आपके भक्तों के मन में भेद आ गया है। आपको राम बनने में कितनी देर लगेगी? आज आप राम बन जाइए।” और फिर… भक्त की पुकार पर बिहारी जी ने बांसुरी त्याग दी। गोपियों का संग छोड़ा, और साक्षात् रघुनाथ बन गए-धनुष-बाण हाथ में धारण कर। यह कोई कथा मात्र नहीं, यह भक्ति की विजय है। यह प्रमाण है कि भगवान रूप बदलते हैं, पर भक्त का भाव नहीं बदलता। तुलसीदास हमें सिखाते हैं कि भक्ति ऊँचाई नहीं माँगती, वह तो विनम्रता चाहती है। जहाँ दैन्य है, वहीं राम हैं। जहाँ समर्पण है, वहीं कृष्ण हैं। ऐसे संत युगों में एक बार आते हैं। ऐसे क्षण आत्मा को झकझोर देते हैं। बोलिए- तुलसीदास महाराज की जय। श्री रामचन्द्र महाराज की जय। श्री कृष्ण महाराज की जय। यदि यह कथा आपके हृदय को स्पर्श करे, तो इसे आगे बढ़ाइए क्योंकि भक्ति बाँटने से बढ़ती है। शुभ रात्रि जय श्री महाकाल 🙏🙏 🌺🌺🥀🥀🥀🥀🥀 बाबा महाकाल की कृपा सदैव आप सभी पर बनी रहे। जय श्री महाकाल 🙏🙏 🌞🚩🚩 ll जय श्री राम ll 🚩🚩🌞 🌞🚩🚩 ll जय बजरंग बली ll 🚩🚩🌞
Comments (12)

H.S.CHAHAR
Jan 3, 2026
🌹🙏जय श्री कृष्णा जय श्री राधे राधे जी भगवान आपको धन सुख संपत्ति वैभव सम्मान आपके जीवन में बहुत सारी खुशियां प्रदान करें आप ऐसे ही अच्छी-अच्छी पोस्ट डालते रहे जय श्री कृष्णा जय श्री राधे राधे 🙏🌹

Saumya Sharma
Jan 2, 2026
जय माता दी 🙏 लक्ष्मी माता कृपा करें, ऐसा दें वरदान, सुख, समृद्धि, यश,वैभव, मिले मान सम्मान, जीवन में आगे बढ़ने को, सरस्वती दें ज्ञान, संतोषी संतोष दें, बने अलग पहचान ☺️ आप सदैव स्वस्थ रहें, समृद्ध रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें 🙏,इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम बहना जी 🙏

Saumya Sharma
Jan 2, 2026
जय श्री राधे कृष्ण जी 🙏

Umesh Sharma
Jan 2, 2026
radhe radhe🌹shubh ratri🌹

प्रेम कुमार
Jan 2, 2026
🌹 जय श्री कृष्णा 🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Jan 2, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Radhe Radhe
Jan 2, 2026
‼️राधे राधे जय श्री कृष्ण जी।‼️

Suresh Kumar
Jan 2, 2026
राधे राधे जी 🙏शुभ रात्री वंदन मेरी बहन

R k jangid phulera Jaipur
Jan 2, 2026
जय श्री राधे कृष्णा शुभ रात्रि वंदन जी🙏

