
Rama Devi Sahu
175 days ago
पवित्र नगरी Puri में भगवान Jagannath, Balabhadra और Subhadra की काष्ठ (लकड़ी) से बनी दिव्य मूर्तियों की पूजा प्रेममयी भाई-बहन के रूप में की जाती है। ये तीनों मिलकर पूरे संसार को आशीर्वाद देते हैं और भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखते हैं। धार्मिक ग्रंथ Skanda Purana के अनुसार प्राचीन समय में राजा Indradyumna को भगवान विष्णु के दिव्य रूप के दर्शन करने की तीव्र इच्छा हुई। उन्होंने लंबे समय तक भक्ति और तप किया। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि समुद्र तट पर एक दिव्य लकड़ी का लट्ठा आएगा, उसी से उनकी मूर्तियाँ बनाई जाएँ। कुछ समय बाद एक रहस्यमयी बढ़ई वहाँ आया और उसने मूर्तियाँ बनाने की सहमति दी, लेकिन उसने एक शर्त रखी — जब तक वह काम कर रहा हो, तब तक कोई भी दरवाजा नहीं खोलेगा। कई दिन बीत गए और भीतर से कोई आवाज नहीं आई। राजा चिंतित हो गए और अंततः उन्होंने दरवाजा खोल दिया। जैसे ही दरवाजा खुला, वह रहस्यमयी बढ़ई गायब हो गया और भगवान Jagannath, Balabhadra और Subhadra की अधूरी किंतु दिव्य मूर्तियाँ दिखाई दीं। राजा को बहुत दुख हुआ, लेकिन तभी आकाशवाणी हुई कि ये रूप स्वयं भगवान की इच्छा से ही ऐसे बने हैं। तभी से इन अनोखी मूर्तियों की पूजा की जा रही है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर के लिए बाहरी पूर्णता नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण है। हर वर्ष भव्य Rath Yatra के दौरान तीनों दिव्य भाई-बहन विशाल रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं और लाखों भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। 📿 संस्कृत श्लोक : जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे॥ ✨ अर्थ : “हे जगन्नाथ, आप सदा मेरी दृष्टि के मार्ग में रहें और मेरे जीवन का मार्गदर्शन करें।” 🙏 जय जगन्नाथ

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