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Rama Devi Sahu

173 days ago

🙏 शीतला माता जी की दूसरी कथा..!! 🌺 शीतला माता को बासी पकवान का भोग लगाया जाता है। हर साल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी आती है। इस दिन माता शीतला की पूजा और कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। शीतला माता की कथा। एक गांव में एक ब्राह्मण दंपति रहता था। उनके दो बेटे और दो बहुएं थी। उन दोनों बहुओं को बहुत ही लंबे समय बाद बेटे हुए। इतने में शीतला अष्टमी का पर्व आया। शीतला अष्टमी के नियमानुसार, इस दिन ठंडा भोजन तैयार किया जाताहै। लेकिन, उन दोनों बहुओं के मन में विचार आया की यदि हमनें ठंड़ा भोजन खाया तो हम कहीं बीमार न पड़ जाएं। अभी बच्चे भी छोटे हैं कहीं वह भी बीमार न हो जाएं। ऐसा में उन दोनों ने चुपचाप अपने खाना खाने के लिए दो बाटियां पशुओं के दाना देने वाले बर्तन में बनाकर तैयार कर ली। इसके बाद दोनों बहुएं अपनी सास के साथ माता शीतला की पूजा करके घर आई और माता की कथा सुनी। पूजा से लौटकर आने के बाद सास तो शीतला माता के भजन गाने लगी लेकिन, दोनों बहुएं बच्चों के रोने का बहाना बनाकर वहां से घर लौट आइए। इसके बाद दोनों से पशुओं के बर्तन से गरम-गरम बाटी निकाली और उनके सेवन किया। इसके बाद जब सास जब घर वापस आई तो उसने दोनों बहुओं को आवाज लगाई और उनसे भोजन करने के लिए कहा। दोनों से ठंडे भोजन का सेवन किया और फिर अपने काम में लग गई। इसके बाद सास ने काफी देर बाद कहा कि बच्चे बहुत देर से सोएं हैं उन्हें उठाकर भोजन कराके सुला दो। बहुएं जैसे ही अपने बच्चों को उठाने के लिए गई उन्होंने देखा की बच्चे मृत हैं। ऐसा शीतला माता के प्रकोप के कारण हुआ। बहुएं विवश हो गई। सास को सब सारी बात पता चली तो वह बहुओं से लड़ने लगी। सास बोली कि तुम दोनों ने अपने बेटों की बदौलत शीतला माता की अवहेलना की है इसलिए मेरे घर से निकल जाओ और कैसे भी बेटों को स्वस्थ लेकर ही घर में वापस आना। अपने मृत बेटों को लेकर दोनों बहुएं घर से निकल गई और रास्ते में जाते हुए एक जीर्ण वृक्ष के पास पहुंच गई। यह खेजड़ी के वृक्ष के नीचे पहुंची। इसके नीचे दोनों ओरी शीतला दो बहने बैठी थी। दोनों के बालों में जूं थी। वहीं, दोनों बहुएं ठक गई थी। दोनों बहुएं ओरी और शीतला के पास पहुंची। उन दोनों ने ओरी और शीतला के सिर से बहुत सारी जुएं निकाली। जूओं का नाश होने से औरी और शीतला ने अपने मस्तक में बड़ी शीतलता का अनुभव किया और उनसे कहा कि तुम दोनों ने हमारे मस्तक को शीतल ठंडा किया है। वैसे ही तुम्हें पेट की शांति मिले। अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह इतने पर दोनों बहुए बोली की हम किस्मत का दिया हुआ ही लेकर मारी-मारी भटक रहीं है लेकिन, शीतला माता के दर्शन नहीं हुए हैं। शीतला माता ने कहा कि तुन दोनो से पाप किया है, तुम दुष्ट हो, दुराचारिणी हो, तुम्हारा तो मुंह तक देखने योग्य नहीं है। शीतला सप्तमी के दिन ठंडा भोजन करने के बदले तुम दोनों ने गरम भोजन कर लिया था। इतना सुनते ही बहुओं ने शीतला माताजी को पहचान लिया और दोनों ने शीतला माता को प्रणाम किया और गिड़गिड़ाते हुए बोली की हमने अनजाने में गरम खाना खा लिया। आपके प्रभाव को हम नहीं जानती थी। आप हमें क्षमा करो। हम फिर कभी ऐसा नहीं करेंगे। उनके ऐसे वचन सुनकर शीतला माता प्रसन्न हुई और शीतला माता ने मृतक बालकों को जीवित कर दिया। इसके बाद बहुएं अपने बच्चों को लेकर फिर से गांव लोट आई। जब गांव के लोगों को पता चला की शीतला माता ने उनको दर्शन दिए हैं तो लोगों ने बहुत धूमधाम से उनके स्वागत किया और उन्होंने कहा कि हम गांव में शीतला माता के मंदिर का निर्माण करवाएंगे। शीतला माता ने जैसे उन दोनों बहुओं पर अपनी कृपा दृष्टि रखी वैसी हर किसी पर रखें। जय शीतला माता जी 👏👏

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