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Rama Devi Sahu

166 days ago

सत्संग में सुनी एक विचित्र कथा: सन्तो की महिमा. शास्त्रो में मृत्यु कालीन स्तिथि के बारे में बहुत ही बातें बताई गई है। जो पुण्य करे उसके प्राण मस्तिष्क से निकलते है। जिसे कहते है, ब्रह्मरंध द्वारा प्राण निकलना। जो अच्छे कर्म करे उसके प्राण, आँख, कान, नाक, मुह, से निकलते है। जो बुरे कर्म करे और पाप करे उसके प्राण कमर के नीचे वाले सभी जगह से निकल सकते है। शिवानंद स्वामी और हरिहर स्वामी नाम के दो सन्त हुआ करते थे। भगवान के भक्त थे, आरती का प्रचार करते। आपने अक्सर आरतियों में "कहत शिवानंद स्वामी" सुना ही होगा...। शिवानंद स्वामी ने जीवित रहते ही अपनी मृत्यु का समय निश्चित कर लिया, और इसकी घोषणा भी करवा दी। भीड़ इक्कठी हुई। किसी अंग्रेज ने देखा, कि इतनी भीड़? लोगो ने बताया, आज स्वामी जी समाधि ले रहे है। अंग्रेज ने कहा "जिन सन्त को देखने के लिए इतनी भीड़ है, उनके दर्शन में भी कर लूं।" अंग्रेज अफसर जब तक वहां पहुंचा! स्वामी जो ब्रह्मरंध मार्ग द्वारा अपने प्राण अपने प्रियतम प्रभु को समर्पित कर चुके थे। अंग्रेज ने कहा:- इनका तो माथा फूटा पड़ा है। तुम लोगो ने ही इन्हें मारा है। 150 लोगो पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया। सब जेल में। अब यहां हरिहर स्वामी जी परेशान! क्या 150 निर्दोष लोग एक सन्त के कारण अकारण ही दंड भोगेंगे। तब हरिहर स्वामी ने घोषणा करवाई, कि वे भी अपने प्राण उसी विधि से त्यागेंगे, जिस विधि से शिवानंद स्वामी ने अपने प्राण छोड़े। उस अंग्रेज अफसर को भी सूचना दे दी गयी... अंग्रेज के सामने ही हरिहर स्वामी के प्राण ब्रह्मरंध से निकले। कपाल अपने आप फटा। अंग्रेज ने हाथ जोड़ लिए। ऐसी परीक्षा के बाद उन 150 निर्दोष लोगों की रिहाई हुई। इस कथा को सुनने के बाद हमारे मन मे तो एक ही बात आई, भला हम अब ऐसा क्या करें, कि भगवान हम सबको ऐसा ही सौभाग्य प्रदान करें, की प्राण जब निकलें, तो सीधे प्रभु के पास पहुंचे। बीच मे स्वर्ग नरक का चक्कर न हो।

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 17, 2026

Ji Namaste 🙏 Ram Ram, Shubha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rohit  Patel

Rohit Patel

Mar 17, 2026

जी रमा जी 🙂🙏💞💞💞