MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

462 days ago

🙏‼️ Vata Savitri ki Puja ‼️🙏 बट सावित्री व्रत भारतीय महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला एक विशेष व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है और इसमें बड़ (वट) के पेड़ की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा (कहानी): सावित्री-सत्यवान की अमर गाथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में राजा अश्वपत‍ि की पुत्री सावित्री अत्यंत रूपवती, विदुषी और दृढ़व्रती थी। उसने स्वयंवर में सत्यवान नामक वनवासी, तपस्वी और धर्मात्मा राजपुत्र को पति के रूप में चुना। नारद मुनि ने सावित्री को बताया कि सत्यवान एक वर्ष के भीतर मृत्यु को प्राप्त होगा, परंतु सावित्री अपने निश्चय से नहीं डिगी और उसी से विवाह किया। विवाह के बाद सावित्री अपने पति के साथ वन में रहने लगी। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु का दिन आया, वह व्रत रखकर उनके साथ वन में गई। वहां सत्यवान लकड़ी काटते समय अचेत हो गए और यमराज उनके प्राण लेने आए। सावित्री ने यमराज का पीछा करते हुए उन्हें धर्म, भक्ति और वचन की शक्ति से प्रसन्न कर दिया। यमराज ने उससे तीन वर माँगने को कहा। सावित्री ने बुद्धिमानी से पहले वर में अपने ससुर का नेत्रदर्शन, दूसरे वर में उनके राज्य की पुनर्प्राप्ति और तीसरे वर में अपने गर्भ से सौ पुत्रों की माँ बनने का वर माँगा। यमराज को अंततः सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। धार्मिक मान्यताएं और महत्व इस व्रत को करने से पति की उम्र लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यह व्रत सावित्री की भक्ति, शक्ति, धैर्य और बुद्धिमानी का प्रतीक माना जाता है। बड़ के वृक्ष को त्रिदेवों का वास स्थान माना गया है—ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इस दिन बड़ के वृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा करने से सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है। बट सावित्री पूजा विधि 1. स्नान व ध्यान: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। 2. व्रत व उपवास: महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। कुछ महिलाएं फलाहार करती हैं। 3. पूजन सामग्री: बड़ के पत्ते, जल का कलश, मौली (कलावा), धूप-दीप, चंदन, फल, मिठाई, अक्षत, फूल, साबुत सुपारी, नारियल, नया वस्त्र, कथा पुस्तक। 4. वट वृक्ष की पूजा: बड़ के वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत या मौली लपेटती हैं और 7 या 21 बार परिक्रमा करती हैं। प्रत्येक परिक्रमा पर कथा और मंत्रों का पाठ करती हैं। 5. व्रत कथा का श्रवण: सावित्री-सत्यवान की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करती हैं। 6. पति का आशीर्वाद लेना: पूजा के पश्चात अपने पति के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लिया जाता है। विशेष मंत्र “ॐ वट सावित्री व्रतमहम् करिष्ये। सावित्र्यै नमः पतिव्रता धर्मे स्थिता पतिलाभं कुरु में सदा। 🙏🙏🙏🚩

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!