
Rama Devi Sahu
68 days ago
जब-जब भक्तों या देवों पर संकट आया, बजरंगबली ने स्वयं आकर हर बाधा का निवारण किया। 🙏 गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक' केवल एक वंदना नहीं है, बल्कि यह उन असीम लीलाओं का एक शक्तिशाली वृत्तांत है—चाहे वह बालपन में सूर्य देव को भक्षण करना हो, पाताल में अहिरावण का वध करना हो, या फिर गरुड़ जी को बुलाकर नागपाश का संकट काटना हो। जो भी सच्चे मन से इसका स्मरण करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। जय श्री राम! जय बजरंगबली! 🚩✨ ॥ श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक ॥ (मत्तगयन्द छन्द) १. बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥ देवन आनि करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निहारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ २. बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो। चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिये कौन विचार विचारो॥ कै द्घिज रुप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ३. अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो। जीवत न बचिहों हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो॥ हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ४. रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो। ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो॥ चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ५. बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो। लै गृह वैघ सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु-बीर उपारो॥ आनि संजीवनी हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ६. रावण युद्घ अजान कियो तब, नाग की फांस सबै सिर डारो। श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो॥ आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ७. बन्धु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पाताल सिधारो। देवहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो॥ जाय सहाय भयो तबही, अहिरावण सैन्य समैत संहारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ८. काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो। कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहिं जात है टारो॥ बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो। को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ॥ दोहा ॥ लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर। बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

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