
Rama Devi Sahu
24 days ago
नीले अंबर की छाती पर, उड़ता वह विमान था, दुबई से तेल अवीव का, सफर बड़ा अंजान था। तभी काल ने आँख दिखाई, कॉकपिट में हाहाकार हुआ, रक्षक ही जब भक्षक बन बैठा, पीठ पे सीधे वार हुआ। सह-पायलट ने खंजर ताना, साज़िश थी बदनाम बड़ी, विमान गिराने की ज़िद पर, मौत सामने आ खड़ी। लहूलुहान थे कैप्टन स्मित, बहती खून की धार थी, पर सीने में भारत मां की, वह हिम्मत की तलवार थी। घायल होकर भी वो योद्धा, पल भर को ना हारा था, 174 मासूमों की, साँसों का वो सहारा था। ज़ख्मों की परवाह किए बिन, दुश्मन से वो भिड़ गया, कॉकपिट का दरवाज़ा खोल, वीरों की तरह अड़ गया। यात्री जागे, हिम्मत जागी, सबने मिलकर ज़ोर किया, आसमान में मौत की साज़िश का, पल में अंत घनघोर किया। सऊदी की धरती पर जाकर, जब महफ़ूज़ विमान लगा, दुनियां बोली— 'ऐ भारत के वीर, तुझ सा ना कोई बलवान लगा'। सलाम है उस जाबाँज़ को, जिसने नया इतिहास लिखा, मौत के मुँह से ज़िंदगी छीनी, शौर्य का ऐसा प्रकाश लिखा। कैप्टन स्मित मछार तुम पर, इस पूरे देश को नाज़ है, तुम्हारी उस जाबाँज़ी पर, झुकता आज आकाश है!

Comments (2)

RAMESH CHAND
Oct 3, 2026
सुप्रभात बहन ज़ी 🙏

sanjeev kohli ॐ 🔱 ॐ 🙏 🌹🚩
Oct 2, 2026
✌️🥇👌💯 real hero ॐ शिव ॐ 🙏🌹🚩
