
shree gohil
227 days ago
🔥 हवन में दी गई #आहुति कहाँ जाती है? जानिए शिवजी द्वारा बताया गया #रहस्य! 🔥 एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से अग्नि देव का परिचय पूछा, जिनकी उपासना स्वयं महादेव करते हैं। शिवजी ने जो गूढ़ रहस्य बताए, वे अत्यंत अद्भुत हैं। 📜 कब और कैसे हुई अग्नि की उत्पत्ति? शिवजी के अनुसार, अग्नि देव आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, आधी रात, शनिवार, रोहिणी नक्षत्र और मीन लग्न में पाताल से प्रकट हुए। उनका एक नाम 'अगोचर' भी है। 💧 कौन हैं अग्नि के माता-पिता? यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे! माता: वन की सूखी लकड़ी (समिधा/अरणि)। क्योंकि अग्नि स्वाभाविक रूप से लकड़ी में ही गुप्त रहती है और घर्षण से प्रकट होती है। पिता: जल। क्योंकि जल से ही वन (लकड़ी) की उत्पत्ति होती है। गोत्र: शाण्डिल्य। ✨ अग्नि देव का विराट स्वरूप: नेत्र: बारह आदित्य (सूर्य) ही इनके बारह नेत्र हैं। जिह्वाएं (जीभ): इनकी 7 जिह्वाएं हैं जिनसे वे आहुति ग्रहण करते हैं - काली, कराली, मनोजवा, सुलोहिता, सुधूम्रवर्णा, स्फुलिंगिनी और विश्वरूपी। तीनों लोकों में वास: मृत्युलोक, स्वर्गलोक और पाताललोक—तीनों लोक अग्नि से ही बंधे हुए स्थिर हैं। द एक मात्र साधन: अग्नि ही वह माध्यम है जिसके द्वारा हविष्य देवताओं तक पहुँचता है। जब हम प्रेमपूर्वक "स्वाहा" कहकर आहुति देते हैं, तो वह सीधे महाविष्णु के मुख में प्रवेश करती है, जिससे ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों तृप्त हो जाते हैं। प्रिय भोजन (हवन सामग्री): घी, जौ, तिल, दही, खीर, श्रीखंड और मिठाई। इस दिव्य ज्ञान को अधिक से अधिक शेयर करें। ।। ॐ अग्नये नमः ।। 🙏

Comments (1)

Riya Riya 💖💖
Jan 19, 2026
Good Evening🪔🙏🙏
