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*राणकपुर जैन मंदिर - अरावली की गोद में संगमरमर का अजूबा* *1. स्थान और इतिहास* - *कहाँ है*: राजस्थान के पाली जिले में, उदयपुर से 91 किमी और जोधपुर से 162 किमी दूर। अरावली पर्वतमाला की तलहटी में मगाई नदी के किनारे बसा है - *कब बना*: निर्माण 15वीं शताब्दी में 1433-1446 विक्रम संवत में शुरू हुआ। इसे पूरा होने में करीब *50 साल* लगे - *किसने बनवाया*: जैन व्यापारी *धन्ना शाह* ने सपना देखने के बाद बनवाया। मेवाड़ के *राणा कुम्भा* ने जमीन दी। शिल्पी *देपा/दीपक मुंडारा* ने डिजाइन किया। राणा कुम्भा के नाम पर ही जगह का नाम "रणकपुर" पड़ा ff37d39ff2b527d9 *2. मुख्य देवता और नाम* - यह *श्वेतांबर जैन मंदिर* है जो प्रथम तीर्थंकर *भगवान ऋषभनाथ/आदिनाथ* को समर्पित है - इसे *चौमुखा मंदिर* या *चतुर्मुख धारणा विहार* भी कहते हैं, क्योंकि गर्भगृह में आदिनाथ की 72 इंच/6 फीट ऊंची *चार-मुख वाली मूर्ति* है जो चारों दिशाओं में देखती है f6a2ff37af7b *3. वास्तुकला की खास बातें* - *क्षेत्रफल*: 48,000 वर्ग फुट से ज्यादा में फैला है - *1444 खंभे*: मंदिर में कुल 1444 संगमरमर के खंभे हैं और *कोई भी दो खंभे एक जैसे नहीं हैं*। खास बात ये कि कोई भी खंभा मुख्य मूर्ति के दर्शन में बाधा नहीं डालता - *डिजाइन*: तिमंजिला मंदिर है। चारों दिशाओं में 4 द्वार, 29 हॉल, 80 गुंबद और 72 सभागृह हैं - *नक्काशी*: संगमरमर पर देवी-देवताओं, नृत्य करती मूर्तियों, ज्यामितीय पैटर्न की बारीक नक्काशी है। कुछ खंभे दिन में *सुनहरे से हल्के नीले रंग* में बदलते दिखते हैं - *आपदा से बचाव*: मंदिर में एक तहखाना भी बना है जो अब बंद है af7bff37f2b59c08 *4. मंदिर परिसर* परिसर में मुख्य चौमुखा मंदिर के अलावा *पार्श्वनाथ मंदिर, नेमिनाथ मंदिर, सूर्य मंदिर और अंबा माता का मंदिर* भी हैं af7b *5. महत्व* - जैन धर्म के *पांच सबसे महत्वपूर्ण तीर्थों* में से एक है - इसे *"खंभों का खजाना"* भी कहते हैं - मान्यता है कि यहां दर्शन करने से व्यक्ति 84 लाख योनियों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है af7bf6a2216b *6. दर्शन की जानकारी* - *समय*: सुबह 6:00 से शाम 7:00 बजे तक। पर्यटकों के लिए दोपहर 12:00 से 5:00 बजे तक विशेष प्रवेश - *प्रवेश*: भारतीय नागरिकों के लिए निःशुल्क। फोटोग्राफी के लिए अलग शुल्क - *नियम*: मंदिर के अंदर *केवल जैन धर्मावलंबियों को पूजा* की अनुमति है। बाकी लोग दर्शन कर सकते हैं। कपड़े से पैर, कंधे और भुजाएँ ढकी होनी चाहिए - *बेस्ट टाइम*: अक्टूबर से मार्च, जुलाई से सितंबर भी अच्छा - *कैसे पहुंचें*: नजदीकी एयरपोर्ट उदयपुर 108 किमी, रेलवे स्टेशन फालना 35 किमी e50827d99c08 हर साल 5-7 लाख देशी और 1.5-1.75 लाख विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। ये मंदिर भक्ति, कला और विज्ञान का अद्भुत संगम है।

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