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_मोबाइल चार्जर' मोबाइल से जुड़ा नहीं है, लेकिन बटन चालू है तो बिजली का उपयोग होता है?' यही सवाल टीवी, एसी जैसे उपकरणों के लिए भी लागू होता है। जिनका बटन चालू होता है, लेकिन उपयोग नहीं हो रहा है, तो बिजली का उपयोग होता है?_ बिजली निर्माण के स्थान पर एसी वोल्टेज बनता है और वह हमारे घर तक उसी रूप में पहुंचता है। लगभग सभी आधुनिक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण डीसी वोल्टेज पर काम करते हैं। तो इन उपकरणों को एसी वोल्टेज से डीसी वोल्टेज में रूपांतरण करने के लिए कुछ कनवर्टर सर्किट का उपयोग किया जाता है। इसमें ट्रांसफॉर्मर, रेक्टिफायर, फिल्टर का उपयोग होता है। अब चार्जर का उदाहरण लेते हैं यह कैसे काम करता है _चार्जर 5 वोल्ट डीसी हमारे मोबाइल को देता है। हम चार्जर को 230 वोल्ट एसी देते हैं। तो ट्रांसफॉर्मर इस 230 वोल्ट एसी को 12 वोल्ट एसी में रूपांतरित करता है। कम से कम बिजली का नुकसान करके यह रूपांतरण करना ट्रांसफॉर्मर का काम है_। फिर रेक्टिफायर नाम का सर्किट डायोड का उपयोग करके एसी को डीसी वोल्टेज में रूपांतरित करता है। चार्जर मोबाइल से जुड़ा नहीं है तो रेक्टिफायर, फिल्टर और बाकी सब कुछ काम नहीं करता और ऊर्जा का उपयोग नहीं होता, _लेकिन ट्रांसफॉर्मर अपना काम करता रहता है। क्योंकि ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक और द्वितीयक वायड, जिसमें विजेचा प्रवाह चालू रहता है_। तो आप चार्जर उपयोग में ला रहे हैं या नहीं, ट्रांसफॉर्मर अपना काम करता रहता है। 1 साधारण 5 वाट का चार्जर अगर बटन बंद न करके दिनभर चालू रहता है तो 1 वाट ऊर्जा वाया जाता है। चार्जर खराब दर्जे का होगा तो 20% और ऊर्जा वाया जाएगी। सालभर ऐसा होता रहेगा तो 365 वाट ऊर्जा का नुकसान। 6 रुपये एक यूनिट की कीमत पकड़ें तो लगभग 2000 रुपये की बिजली वाया जाती है। पैसे में मोजें तो ज्यादा लगता नहीं, _लेकिन कितने घरों में ऐसे कितने चार्जर चालू छोड़ दिए जाते हैं। 1 किलोवाट ऊर्जा वातावरण में 1 पाउंड कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है। दुनिया में सिर्फ इन चार्जर्स के कारण लाखों किलोवाट ऊर्जा वाया जाती है और इसके कारण हानिकारक गैसों का नाहक उत्सर्जन होता है_। मोबाइल चार्ज नहीं कर रहे हैं तो बटन भी बंद करें, क्योंकि वह थोड़ी बिजली उपयोग करता है। _तो आइए, हम आज से तय करें कि काम नहीं होगा तो बटन बंद करेंगे_। पुराने चार्जर 5 वाट के हैं, लेकिन नए आने वाले चार्जर 30 वाट तक आते हैं। 6 गुना ऊर्जा मतलब 6 गुना नुकसान। पहले घर में सबके मिलाकर एक चार्जर होता था, लेकिन अब हर किसी का एक या आळशी लोगों का हर कमरे में एक चार्जर होता है। इस हिसाब से हर व्यक्ति से कितनी ऊर्जा का अपव्यय होता है, इस पर विचार करने की जरूरत है। भारत में हमेशा की तरह यह उपेक्षित विषय है, _लेकिन यूरोपियन देशों ने 1 वाट नीति अपनाई है, यानी उपकरण का बटन बंद न हो तो 1 वाट से ज्यादा ऊर्जा उपयोग नहीं करनी चाहिए। ऐसे कानून हैं_। बिजली की मांग और उपयोग बढ़ रहा है, तो इस अनुषंग से हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करना होगा। _मोबाइल चार्ज कर रहे हैं तो बटन भी बंद करें, क्योंकि वह थोड़ी ऊर्जा उपयोग करता है_। इसलिए जितने भी उपकरण हैं, उन पर यह नियम लागू करें। ऊर्जा का अपव्यय टालें, क्योंकि _ऊर्जा बचत ही ऊर्जा निर्माण है_। चार्जर एक उदाहरण है, सभी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, लैपटॉप के लिए भी यह नियम लागू है, बटन बंद करना या शटडाउन करना ही विकल्प है। _चार्जर, लैपटॉप, टीवी, एसी जैसे उपकरणों का उपयोग न होने पर बटन बंद करें_।

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