
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
164 days ago
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🚩🚩 _गुढीपाड़वा की हार्दिक शुभकामनाएं_🚩🚩 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 _गुढीपाड़वा क्यों मनाया जाता है? जानें शास्त्र, इतिहास और महत्व_ _चैत्र शुद्ध प्रतिपदा_ यानी वसंत ऋतू के आगमन की शुरुआत है, इतना ही नहीं बल्कि विश्वोत्पत्ति के आदिम क्षणों का यह साक्षी है। शिशिर में पेड़ों से पत्ते झड़ने के बाद ऋतूचक्र धीरे-धीरे बदलता है और पर्णहीन वृक्षों को नवचैतन्य की चाहत लगती है, रंगीन फूलों से डरे हुए वृक्ष का पुष्पवैभव देखकर आम के पेड़ों में मोहोर आने लगते हैं और नवऋतू के स्वागत में कहीं दूर कोकिल "राग वसंत" गाती है। सर्जनशील प्रकृति के रंग, रूप, गंध, नाद और स्पर्श की शालीनता वसंत के आगमन की वर्दी है। ब्रह्म पुराण के अनुसार महाप्रलय के बाद ब्रह्मदेव ने चैत्र शुद्ध प्रतिपदा के दिन विश्व की उत्पत्ति की। इस तिथि को भूतल पर नवजीवन संचालित हुआ। एक पौराणिक कथा के अनुसार मर्यादापुरुषोत्तम रघुपति श्री रामचंद्र ने रावण का पराभव कर असुरी शक्ति का नाश किया और चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता के साथ अयोध्या लौटे, उस दिन अयोध्यावासियों ने तोरण, पताका लगाकर, गुढ़ी उभारकर विजयोत्सव मनाया, उसी दिन से गुढ़ी उभारने की प्रथा प्रचलित हुई। _आयुर्वेद दृष्टिकोण_ से देखें तो गुढीपाड़वा के दिन नीम, हींग, गुड़, धनिया, जीरा, अजवायन को एकत्र कर तैयार किए गए जीवन रस का सेवन किया जाता है। "वसंत" इस वैभवसंपन्न ऋतुराज के बाद आने वाले ग्रीष्म ऋतू को सहन करने की शारीरिक क्षमता निर्माण करने के उद्देश्य से इस जीवन रस का सेवन किया जाता है। कुछ जगहों पर गुढीपाड़वा के दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती है, तो कुछ जगहों पर लक्ष्मी यानी संपत्ति की पूजा की जाती है, कहीं-कहीं नए काम की शुरुआत गुढीपाड़वा से की जाती है, ऐसा यह बहुआयामी चैत्र पाड़वा। कुल मिलाकर यह मानव जीवन के तले बहने वाली एक चैतन्य स्त्रोत का उद्गम दिन है। जीर्णता से अंकुर की रुजवात करने वाला यह दिन, चैतन्य का प्रतीक गुढीपाड़वा है। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
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