
Rama Devi Sahu
60 days ago
|| जय श्री राधा माधव || • अकेलापन कमजोरी नहीं, आत्मनिर्भर बनने का अवसर है। • जो स्वयं पर विश्वास रखता है, वह भीड़ का मोहताज नहीं होता। • ईश्वर ने हर व्यक्ति को अद्वितीय क्षमता और सामर्थ्य दी है। • जब सब साथ छोड़ दें, तब भी आपका आत्मबल और प्रभु का साथ आपके साथ रहता है। • अपनी योग्यता को पहचानिए, स्वयं को कम मत आँकिए; क्योंकि आप अपने जीवन को बदलने के लिए पर्याप्त हैं। "यदि श्रीकृष्ण आपके हृदय में हैं और आत्मविश्वास आपके भीतर है, तो आप कभी अकेले नहीं हैं। आप अकेले ही काफी हैं।" अक्सर जब जीवन में लोग साथ छोड़ देते हैं, परिस्थितियाँ विपरीत हो जाती हैं या हमें लगता है कि कोई हमारा सहारा नहीं है, तब हम स्वयं को अकेला समझने लगते हैं। परन्तु सत्य यह है कि यदि आपके भीतर आत्मविश्वास, सही सोच, दृढ़ संकल्प और भगवान की कृपा है, तो आप अकेले होकर भी बहुत कुछ कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन को यही सिखाया था कि अपनी शक्ति को पहचानो। जब मनुष्य स्वयं पर और ईश्वर पर विश्वास करता है, तब उसे बाहरी सहारों की आवश्यकता कम पड़ती है। संसार का सबसे बड़ा बल भीतर का बल होता है। ॥ श्री कृष्ण शरणम् ममः ॥
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