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376 days ago

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ यह श्लोक भगवान हनुमान की स्तुति में है, जो उनकी महानता और गुणों का वर्णन करता है। इसका अर्थ इस प्रकार है: अनुवाद: मैं भगवान हनुमान की शरण लेता हूँ, जो मन के समान तीव्र गति वाले हैं, वायु के समान गति वाले हैं, इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर चुके हैं, बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ हैं, वायुपुत्र हैं, वानरों के समूह के नेता हैं, और श्रीराम के दूत हैं।

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Comments (6)

Adesh

Adesh

Aug 19, 2025

, Ram ram Ram

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Aug 19, 2025

सियाराम चंद्र शंकर हरि ॐ जय जय सियाराम जय जय हनुमान शुभ मंगलवार ये शुभ दिन शुभफलदाई मंगलकारी रहे 🙏🚩🌹

Deepak  karki

Deepak karki

Aug 19, 2025

राम राम जी 🌹🙏 जय श्री बजरंगबली हनुमान जी 🙏🌹 शुभ मंगलवार शुभ दोपहर वंदन जी 🌹🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Aug 19, 2025

जय श्री राम 🙏🌹☺️ जय बजरंगबली 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 19, 2025

Shri Ram Bhakt Hanuman Ji ki Jai Ho 🙏 Subha Mangalvar Subah ki Ram Ram Jii 🙏 🌹🌹