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शराब सिर्फ नशा नहीं, पूरे शरीर की केमिस्ट्री बदल देती है। विस्तार से समझते हैं: *1. पीते ही क्या होता है?* शराब को पचाने की जरूरत नहीं पड़ती। ये पेट से सीधे खून में आ जाती है। क्योंकि ये पानी और वसा दोनों में घुल जाती है, इसलिए शरीर का रक्षक तंत्र (Blood-Brain Barrier) भी इसे रोक नहीं पाता। कुछ ही मिनटों में ये सीधे दिमाग तक पहुंच जाती है। *2. दिमाग पर असर:* दिमाग में 2 मुख्य सिस्टम हैं: - *GABA (शांत करने वाला):* शराब इसे ज्यादा एक्टिव कर देती है। इसलिए सुस्ती, नींद, बोल लड़खड़ाना लगता है। - *Glutamate (जगाने वाला, सोचने वाला):* शराब इसे दबा देती है। इसलिए याददाश्त, सीखने की क्षमता, फैसला लेने की ताकत और शरीर का बैलेंस बिगड़ जाता है। यही कारण है कि पीने के बाद आदमी गिरता है और सुबह कुछ याद नहीं रहता। *3. लीवर में क्या होता है? - सबसे बड़ा नुकसान* लीवर फैक्ट्री की तरह काम करता है। - लीवर शराब को *Acetaldehyde* में बदलता है। ये बहुत जहरीला पदार्थ है और लीवर की कोशिकाओं को मारता है। - इस प्रक्रिया में *NAD+ को NADH* में बदलना पड़ता है। ज्यादा शराब पीने से NADH बहुत बढ़ जाता है। - जब NADH बढ़ता है तो शरीर की चर्बी जलना बंद हो जाती है और लीवर में ही जमा होने लगती है। यही से 3 स्टेज शुरू होती हैं: *Fatty Liver -> Hepatitis (सूजन) -> Cirrhosis (लीवर सख्त होना)* - जो जानलेवा है। *4. विटामिन B1 (Thiamine) की कमी* शराब शरीर को विटामिन B1 को सोखने नहीं देती। B1 हमारे नर्वस सिस्टम की बैटरी है। लंबे समय तक पीने से B1 खत्म हो जाता है, जिससे *याददाश्त जाना, हाथ-पैर कांपना, चलने में लड़खड़ाना, और दिमाग की गंभीर बीमारी (Wernicke-Korsakoff)* हो सकती है। *5. आखिरी बात जो वीडियो कह रहा है:* हर पैग सिर्फ 2-3 घंटे का नशा नहीं है। वो लीवर, दिमाग, विटामिन और पूरे मेटाबॉलिज्म को बदल रहा है। लीवर खुद को ठीक कर सकता है, अगर उसे ब्रेक मिले। > जितनी कम शराब, उतनी बेहतर सेहत।

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