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Rama Devi Sahu

149 days ago

🚩 *~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~* 🚩 🌤️ *दिनांक - 04 अप्रैल 2026* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)* 🌤️ *शक संवत -1948* 🌤️ *अयन - उत्तरायण* 🌤️ *ऋतु - वसंत ॠतु* 🌤️ *मास - वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र)* 🌤️ *पक्ष - कृष्ण* 🌤️ *तिथि - द्वितीया सुबह 10:08 तक तत्पश्चात तृतीया* 🌤️ *नक्षत्र - स्वाती रात्रि 09:35 तक तत्पश्चात विशाखा* 🌤️ *योग - हर्षण दोपहर 02:17 तक तत्पश्चात वज्र* 🌤️*राहुकाल - सुबह 09:36 से सुबह 11:09 तक* 🌤️ *सूर्योदय - 06:30* 🌤️ *सूर्यास्त - 06:53* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण-* 💥 *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩 🌷 *विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए* 🌷 👉 *05 अप्रैल 2026 रविवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 09:52)* 🙏🏻 *शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :* 🌷 *ॐ गं गणपते नमः ।* 🌷 *ॐ सोमाय नमः ।* 🙏🏻 🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩 ‪🌷 *चतुर्थी‬ तिथि विशेष* 🌷 🙏🏻 *चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं।* 📆 *हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।* 🙏🏻 *पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।* 🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥* ➡ *“ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।* 🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩 🌷 *कोई कष्ट हो तो* 🌷 🙏🏻 *हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |* 👉🏻 *छः मंत्र इस प्रकार हैं –* 🌷 *ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।* 🌷 *ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।* 🌷 *ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।* 🌷 *ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।* 🌷 *ॐ अविघ्नाय नम:* 🌷 *ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:* *- ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩

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