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Rama Devi Sahu

135 days ago

यह कथा नर्मदा नदी के उद्गम और उनके 'उल्टा' (पश्चिम की ओर) बहने के पौराणिक कारण को बताती है। कथा के अनुसार, अंधकासुर राक्षस के वध के बाद भगवान शिव अमरकंटक की पहाड़ियों पर विश्राम कर रहे थे। उनके माथे से गिरे पसीने की बूंदों से एक अत्यंत सुंदर कन्या का जन्म हुआ। शिव के मन को 'नर्म' (सुख) प्रदान करने के कारण उनका नाम 'नर्मदा' रखा गया और उन्हें प्रलय में भी न मिटने का वरदान मिला। नर्मदा का विवाह सोनभद्र (सोन नद) के साथ तय हुआ, जिनसे वे प्रेम करती थीं। विवाह से पहले सोनभद्र को देखने की इच्छा से उन्होंने अपनी दासी और सखी जुहिला को अपने आभूषण पहनाकर, संदेश और उपहार के साथ उनके पास भेजा। लेकिन सोनभद्र, जुहिला को सजे-धजे रूप में देखकर उसे ही नर्मदा समझ बैठे और उस पर मोहित हो गए। जुहिला ने भी उन्हें सच नहीं बताया। जब नर्मदा स्वयं वहाँ पहुँचीं और सोनभद्र को जुहिला के साथ मग्न देखा, तो उन्हें गहरा आघात लगा। प्रेमी और सखी के इस धोखे से क्रोधित और आहत होकर उन्होंने निर्णय लिया कि वे जीवन भर अकेली (कुमारी) ही रहेंगी। उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया और सोनभद्र के विपरीत पश्चिम की ओर बहने लगीं। यह कहानी एक ऐसी स्त्री के स्वाभिमान का प्रतीक है जिसने धोखे के आगे झुकने के बजाय अपनी नई राह चुनी।

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 17, 2026

🌹🌹 Shubha Sandhya Vandan Jii 🌹🌹

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Apr 17, 2026

🙏🙏🙏🙏🙏