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Rama Devi Sahu

67 days ago

कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन। ज जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन॥ 🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️🌧️ भावार्थ:--- स्वाति नक्षत्र में बरसने वाली जल की बूंद तो एक ही तरह की होती है, लेकिन उसकी संगति के अनुसार उसका परिणाम बदल जाता है। यदि वह बूंद केले (कदली) पर गिरती है तो कपूर बनती है, सीप में गिरती है तो मूल्यवान मोती बनती है, और यदि सांप (भुजंग) के मुंह में गिरती है तो विष (जहर) बन जाती है। मनुष्य भी जैसी संगति में बैठता है, वैसा ही बन जाता है। 🙏🚩🌺जय श्रीराम🌺🙏 🚩

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