
Rama Devi Sahu
157 days ago
यह दोहा गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस से लिया गया है, जिसमें भगवान श्रीराम के अवतरण का उद्देश्य अत्यंत स्पष्ट रूप से बताया गया है। इस दोहे में भगवान राम के अवतार की गूढ़ता, उनकी करुणा और धर्म की स्थापना का भाव समाहित है। दोहे का भावार्थ: बिप्र (ब्राह्मण), धेनु (गाय), सुर (देवता), और संत (संतजन) — इन सभी की रक्षा हेतु भगवान ने मनुष्य रूप में अवतार लिया। यह अवतार उनकी निज इच्छा से हुआ, जिसमें उन्होंने माया को पार कर गुणातीत शरीर धारण किया।

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