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🚩श्री गणेशाय नम:🚩 📜 दैनिक पंचांग 📜 ☀ 09 - Apr - 2026 ☀ Ujjain, India ☀ पंचांग 🔅 तिथि सप्तमी 09:22 PM 🔅 नक्षत्र मूल 08:49 AM 🔅 करण : विष्टि 08:16 AM बव 08:16 AM 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग परिघ 05:56 PM 🔅 वार गुरूवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 06:12 AM 🔅 चन्द्रोदय +01:14 AM 🔅 चन्द्र राशि धनु 🔅 सूर्यास्त 06:45 PM 🔅 चन्द्रास्त 11:03 AM 🔅 ऋतु वसंत ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1948 पराभव 🔅 कलि सम्वत 5127 🔅 दिन काल 12:32 PM 🔅 विक्रम सम्वत 2083 🔅 मास अमांत चैत्र 🔅 मास पूर्णिमांत वैशाख ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 12:03:45 - 12:53:57 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त 10:23 AM - 11:13 AM 🔅 कंटक 03:24 PM - 04:14 PM 🔅 यमघण्ट 07:02 AM - 07:52 AM 🔅 राहु काल 02:02 PM - 03:37 PM 🔅 कुलिक 10:23 AM - 11:13 AM 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 05:04 PM - 05:55 PM 🔅 यमगण्ड 06:12 AM - 07:46 AM 🔅 गुलिक काल 09:20 AM - 10:54 AM ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल दक्षिण ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती ☀ चन्द्रबल 🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

Comments (2)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Apr 9, 2026

बहुत ही सुंदर टिप्पणियाँ! सराहना करता हूँ। आपको हार्दिक बधाई! गुरुवार सुबह का दिन 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Apr 8, 2026

▶️ भगवान नृसिंह प्रार्थना ( मंत्र, स्तवः), पौराणिक कथा ◀️ 🟨🌼🟨 नरसिंह विग्रह के दस (१०) प्रकार 🟨🌼🟨 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ वागीशायस्य बदने लर्क्ष्मीयस्य च बक्षसि। यस्यास्ते ह्र्देय संविततं नृसिंहमहं भजे ॥ नरसिंह नर + सिंह ("मानव-सिंह") को पुराणों में भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। जो आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट होते हैं, जिनका सिर एवं धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे, वे भारत में, खासकर दक्षिण भारत में वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा एक देवता के रूप में पूजे जाते हैं जो सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। ▶️ प्रार्थना ◀️ नरसिंह के बारे में कई तरह की प्रार्थनाएँ की जाती हैं, जिनमे कुछ प्रमुख ये हैं: 🕉 नरसिंह मंत्र 🕉 ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥ ( हे क्रुद्ध एवं शूर-वीर महाविष्णु, तुम्हारी ज्वाला एवं ताप चतुर्दिक फैली हुई है। हे नरसिंहदेव, तुम्हारा चेहरा सर्वव्यापी है, तुम मृत्यु के भी यम हो और मैं तुम्हारे समक्षा आत्मसमर्पण करता हूँ। ) 🕉 श्री नृसिंह स्तवः 🕉 गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय प्रहलाद हृदयाहलादं भक्ता विधाविदारण। शरदिन्दु रुचि बन्दे पारिन्द् बदनं हरि ॥१॥ नमस्ते नृसिंहाय प्रहलादाहलाद-दायिने। हिरन्यकशिपोर्ब‍क्षः शिलाटंक नखालये ॥२॥ इतो नृसिंहो परतोनृसिंहो, यतो-यतो यामिततो नृसिंह। बर्हिनृसिंहो ह्र्दये नृसिंहो, नृसिंह मादि शरणं प्रपधे ॥३॥ तव करकमलवरे नखम् अद् भुत श्रृग्ङं। दलित हिरण्यकशिपुतनुभृग्ङंम्। केशव धृत नरहरिरुप, जय जगदीश हरे ॥४॥ वागीशायस्य बदने लर्क्ष्मीयस्य च बक्षसि। यस्यास्ते ह्र्देय संविततं नृसिंहमहं भजे ॥५॥ श्री नृसिंह जय नृसिंह जय जय नृसिंह। प्रहलादेश जय पदमामुख पदम भृग्ह्र्म ॥६॥ १ नरसिंह २ नरहरि ३ उग्र विर माहा विष्णु ४ हिरण्यकश्यप अरी ▶️ नरसिंह विग्रह के दस (१०) प्रकार ◀️ १ उग्र नरसिंह २ क्रोध नरसिंह ३ मलोल नरसिंह ४ ज्वल नरसिंह ५ वराह नरसिंह ६ भार्गव नरसिंह ७ करन्ज नरसिंह ८ योग नरसिंह ९ लक्ष्मी नरसिंह १० छत्रावतार नरसिंह/पावन नरसिंह/पमुलेत्रि नरसिंह ▶️ भगवान नृसिंह अवतार की पौराणिक कथा ◀️ जब हिरण्याक्ष का वध हुआ तो उसका भाई हिरण्यकशिपु बहुत दुःखी हुआ। वह भगवान का घोर विरोधी बन गया। उसने अजेय बनने की भावना से कठोर तप किया। तप का फल उसे देवता, मनुष्य या पशु आदि से न मरने के वरदान के रूप में मिला। वरदान पाकर तो वह मानो अजेय हो गया। हिरण्यकशिपु का शासन बहुत कठोर था। देव-दानव सभी उसके चरणों की वंदना में रत रहते थे। भगवान की पूजा करने वालों को वह कठोर दंड देता था और वह उन सभी से अपनी पूजा करवाता था। उसके शासन से सब लोक और लोकपाल घबरा गए। कहीं ओर कोई सहारा न पाकर वे भगवान की प्रार्थना करने लगे। देवताओं की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने हिरण्यकशिपु के वध का आश्वासन दिया। उधर दैत्यराज का अत्याचार दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा था। यहां तक कि वह अपने ही पुत्र प्रहलाद को भगवान का नाम लेने के कारण तरह-तरह का कष्ट देने लगा। प्रहलाद बचपन से ही खेल-कूद छोड़कर भगवान के ध्यान में तन्मय हो जाया करता था। वह भगवान का परम भक्त था। वह समय-समय पर असुर-बालकों को धर्म का उपदेश भी देता रहता था। असुर-बालकों को धर्म उपदेश की बात सुनकर हिरण्यकशिपु बहुत क्रोधित हुआ। उसने प्रहलाद को दरबार में बुलाया। प्रहलाद बड़ी नम्रता से दैत्यराज के सामने खड़ा हो गया। उसे देखकर दैत्यराज ने डांटते हुए कहा- 'मूर्ख! तू बड़ा उद्दंड हो गया है। तूने किसके बल पर मेरी आज्ञा के विरुद्ध काम किया है?' इस पर प्रहलाद ने कहा- 'पिताजी! ब्रह्मा से लेकर तिनके तक सब छोटे-बड़े, चर-अचर जीवों को भगवान ने ही अपने वश में कर रखा है। वह परमेश्वर ही अपनी शक्तियों द्वारा इस विश्व की रचना, रक्षा और संहार करते हैं। आप अपना यह भाव छोड़ अपने मनको सबके प्रति उदार बनाइए।' प्रहलाद की बात को सुनकर हिरण्यकशिपु का शरीर क्रोध के मारे थर-थर कांपने लगा। उसने प्रहलाद से कहा- 'रे मंदबुद्धि! यदि तेरा भगवान हर जगह है तो बता इस खंभे में क्यों नहीं दिखता?' यह कहकर क्रोध से तमतमाया हुआ वह स्वयं तलवार लेकर सिंहासन से कूद पड़ा। उसने बड़े जोर से उस खंभे को एक घूंसा मारा। उसी समय उस खंभे के भीतर से नृसिंह भगवान प्रकट हुए। उनका आधा शरीर सिंह का और आधा मनुष्य के रूप में था। क्षणमात्र में ही नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु को अपने जांघों पर लेते हुए उसके सीने को अपने नाखूनों से फाड़ दिया और उसकी जीवन-लीला समाप्त कर अपने प्रिय भक्त प्रहलाद की रक्षा की। उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥ 🕉 हरिओम तत सत 🕉 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻