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*चैतन्य महाप्रभु* चैतन्य महाप्रभु ने भक्ति को केवल उपासना नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और ईश्वर से आत्मिक मिलन का मार्ग बताया. 15वीं-16वीं शताब्दी में उन्होंने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को जन-जन तक पहुँचाया, और श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम और समर्पण का संदेश दिया. उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर गौड़ीय वैष्णव परंपरा का व्यापक प्रसार हुआ, जिसका प्रभाव आज भी भारत सहित विश्व के अनेक देशों में दिखाई देता है. श्री जगन्नाथ मंदिर से उनका गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा, जहाँ उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय भक्ति और संकीर्तन में व्यतीत किया. *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

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