
Rama Devi Sahu
90 days ago
. “रमणबिहारी मन्दिर (रमणरेती)” रमण रेती मन्दिर परिसर में हर तरफ रेत ही रेत है। यहाँ जो भी कृष्ण भक्त आता है, बिना रेत में लोटे नहीं जाता। फागुन मास में यहाँ भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने बाल रूप में इस रेत पर लीलाएं की थीं। लोग मानते हैं कि इस रेत से बीमारियाँ दूर हो जाती हैं। रमण रेती मन्दिर के संत सुभावना तितरानन्द बताते हैं कि, भगवान कृष्ण के बाल्यावस्था में मन्दिर की जगह जंगल था। इस जगह पर रमण बिहारी (कृष्ण) खेलते थे। एक बार जब रमण बिहारी खेल रहे थे, तब गोपियों ने उनकी गेंद चुरा ली। तब उन्होंने रेत की ही गेंद बना ली। भक्त मानते हैं कि यहाँ की रेत को घुटने वह जोड़ों में रखने पर दर्द खत्म हो जाता है। लोग यहाँ आकर लोटते हैं, ताकि इस पवित्र मिट्टी से वे भी पवित्र हो सकें। मान्यता है कि बालकृष्ण यहाँ चले हैं इसलिए यह पवित्र है। रेत की गेंद बनाकर एक-दूसरे को मारने से पुण्य मिलता है। सारे दुख दूर हो जाते हैं। यहाँ लोग रेत का घर भी बनाते हैं। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। मान्यता है कि इससे अपना घर बनाने की मुराद पूरी होती हैं। मन्दिर के रेत में लोग नंगे पैर चलते हैं। कोई भी जूता, चप्पल पहनकर रेत में नहीं जा सकता है। रेत में कंकड़ नहीं हैं। इसलिए नंगे पांव चलने से कोई असुविधा नहीं होती है और अच्छा लगता है। इस रेत को पूजनीय माना जाता है। लोग इस रेत को अपने साथ भी ले जाते हैं। यहाँ पर संत आत्मानंद गिरि आए। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इन्हें साक्षात् दर्शन दिए। इसलिए यह स्थान सिद्ध स्थान माना जाता है। ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥ ********************************************

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jun 1, 2026
🌹🌹 Very Good Morning Ji 🌹🌹

Rakesh Kumar
Jun 1, 2026
good morning ji
