
Rama Devi Sahu
57 days ago
यह चित्र भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अलग-अलग समय पर दिखाए गए उनके चार 'विराट रूप' (विश्वरूप) के दर्शनों को दर्शाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण ने ये दिव्य दर्शन विशेष उद्देश्यों के लिए दिए थे:1. माता यशोदा को विराट रूप (बाल लीला)जब बाल कृष्ण ने मिट्टी खाई थी, तब माता यशोदा ने उन्हें मुँह खोलने को कहा। जैसे ही कान्हा ने मुँह खोला, यशोदा जी को उनके मुख के भीतर संपूर्ण ब्रह्मांड—ग्रह, नक्षत्र, पर्वत और नदियाँ—दिखाई दिए। यह दर्शन यह समझाने के लिए था कि वे केवल एक बालक नहीं, बल्कि स्वयं ब्रह्मांड के स्वामी हैं।2. अर्जुन को विश्वरूप दर्शन (कुरुक्षेत्र का युद्ध)यह सबसे प्रसिद्ध विराट रूप है, जो उन्होंने महाभारत युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में अर्जुन को दिया था। जब अर्जुन मोहवश युद्ध से पीछे हट रहे थे, तब भगवान ने अपना अनंत रूप दिखाया, जिसमें हजारों हाथ, सिर और अग्नि के समान तेज था। उन्होंने दिखाया कि समस्त सृजन और विनाश उन्हीं के भीतर समाहित है।3. दुर्योधन की सभा में विराट रूपमहाभारत युद्ध से पहले, जब कृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर गए थे, तब अभिमानी दुर्योधन ने उन्हें बंदी बनाने की कोशिश की। उस समय भगवान ने अपना विराट स्वरूप प्रकट किया। पूरी सभा उनके तेज से कांप उठी, जिससे यह सिद्ध हुआ कि परमात्मा को कोई सांसारिक बंधन में नहीं बांध सकता।4. महर्षि उत्तंक को विराट रूपमहाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद, जब श्रीकृष्ण द्वारका लौट रहे थे, तब उनकी भेंट महर्षि उत्तंक से हुई। जब ऋषि को युद्ध में हुए विनाश का पता चला, तो वे क्रोधित होकर कृष्ण को श्राप देने लगे। तब उनकी भक्ति और जिज्ञासा को शांत करने के लिए श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना वही विराट रूप दिखाया जो अर्जुन को दिखाया था।मुख्य भाव:ये सभी प्रसंग यह दर्शाते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण 'अवतारी' पुरुष होने के साथ-साथ स्वयं 'पूर्ण पुरुषोत्तम' परमात्मा हैं, जिनके भीतर पूरा संसार स्थित है। 🙏‼️ Jai Shree Krishna ‼️🙏

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