
Rama Devi Sahu
2 days ago
शरद पूर्णिमा — आत्मा का परमात्मा से मिलन उत्सव ******************************************* कुछ रात्रियाँ केवल समय का हिस्सा नहीं होतीं, वे अनंत की स्मृतियाँ अपने भीतर सँजोए होती हैं। शरद पूर्णिमा ऐसी ही एक दिव्य रात्रि है, जब चंद्रमा का पूर्णत्व केवल आकाश में नहीं, मानो समूची सृष्टि के अंतर्मन में उतर आता है। शीतल चाँदनी में एक अनकहा माधुर्य घुल जाता है, जैसे प्रकृति स्वयं किसी परम रहस्य की साक्षी बनने जा रही हो। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो श्रीकृष्ण का महारास केवल एक दिव्य लीला नहीं, जन्म-जन्मांतर की साधना की पूर्णाहुति है। मान्यता है कि अनेक सिद्ध योगियों और परम भक्तों ने श्रीकृष्ण के अवतार काल में गोपियों के रूप में जन्म लिया, ताकि जिस परम सत्ता की अनुभूति के लिए उन्होंने युगों तक तप किया, उसे प्रेम के रूप में साक्षात् अनुभव कर सकें। ज्ञान ने जिसे जानना चाहा, तपस्या ने जिसे पाना चाहा, वह परम सत्य गोपियों के लिए प्रेममय श्रीकृष्ण बनकर उनके सम्मुख उपस्थित था। गोपियों का कृष्ण की ओर दौड़ना वस्तुतः आत्मा का अपने मूल स्रोत की ओर लौटना था। जब बाँसुरी की ध्वनि उठी, तो वह केवल वन में नहीं गूँजी; उसने उन हृदयों को पुकारा, जिनका अस्तित्व ही कृष्ण के प्रेम में प्रतिष्ठित था। महारास में न कोई पाने की आकांक्षा थी, न स्वयं को सिद्ध करने का भाव। वहाँ केवल समर्पण था—ऐसा समर्पण, जिसमें प्रेम करने वाला स्वयं को भूल जाता है और प्रेम ही उसकी एकमात्र पहचान बन जाता है। कहते हैं, शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा से अमृत बरसता है । ऐसा प्रतीत होता है मानो आकाश का चंद्र भी इस दिव्य मिलन का आनंदोत्सव मना रहा हो। धरती पर श्रीकृष्ण प्रेम की सुधा बहा रहे थे और आकाश में चांद अपनी चाँदनी से उस अनिर्वचनीय आनंद को अभिसिंचित कर रहा हो। शरद पूर्णिमा का महारास हमें बताता है कि परमात्मा को पाना स्वयं से दूर जाना नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप में लौटना है। जब आत्मा का समस्त प्रेम एक ही केंद्र पर समर्पित हो जाता है, तब जीवन साधना नहीं रहता—वह स्वयं महारास बन जाता है। शरद पूर्णिमा का महारास — आत्मा और परमात्मा के मिलन का उत्सव है। गोपियों का कृष्ण-प्रेम उस आत्मा की पुकार है, जो अपने परमात्मा से मिलने को आतुर है। महारास में हर गोपी के लिए कृष्ण उसके प्रेम का केंद्र और उसकी आत्मा का परम आधार थे। यह वह दिव्य मिलन है, जहाँ प्रेम में स्वयं का अस्तित्व मिट जाता है और केवल प्रभु शेष रह जाते हैं। महारास का अर्थ है - जब आत्मा प्रेम में पूर्ण समर्पित हो जाती है, तब परमात्मा से मिलन ही उसका परम आनंद बन जाता है। ©® आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🏻
Comments (4)

Rama Devi Sahu
Oct 25, 2026
🌙🙏 राधे राधे 🙏🌙 दिन भर की सारी चिंताएँ श्री राधा-कृष्ण के चरणों में छोड़कर सुकून से सो जाइए। ❤️ कल की सुबह नई उम्मीद और नई खुशियाँ लेकर आएगी। ✨ 💛 शुभ रात्रि | राधे राधे 💛

Rama Devi Sahu
Oct 25, 2026
🌙🙏 राधे राधे 🙏🌙 दिन भर की सारी चिंताएँ श्री राधा-कृष्ण के चरणों में छोड़कर सुकून से सो जाइए। ❤️ कल की सुबह नई उम्मीद और नई खुशियाँ लेकर आएगी। ✨ 💛 शुभ रात्रि | राधे राधे 💛

Suresh Kumar (Krishan premi)
Oct 25, 2026
राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्री वंदन

soni khanna ♥️🌸राधेराधे🌸💙🌸राधेराधे🌸💛
Oct 25, 2026
राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️ राधे राधे राधे राधे ♥️ राधे राधे ♥️🙏
