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सनक, सनंदन, सनतन और सनतकुमार भगवान ब्रह्मा के प्रथम मानस पुत्र हैं, जिन्हें सनकादि ऋषि या चतुःकुमार के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा ने सृष्टि रचना से पहले घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन चारों के रूप में अवतार धारण किया था। इनकी उत्पत्ति ब्रह्मा के मन (इच्छाशक्ति) से हुई थी, न कि शारीरिक रूप से। इनकी सबसे विशेषता यह है कि ये सदैव पाँच वर्ष की आयु वाले बालक के रूप में ही रहते हैं और इनकी अवस्था भगवान शिव से भी ऊंची मानी जाती है। मुख्य विशेषताएं अवतार: इन्हें भगवान विष्णु का प्रथम अवतार माना जाता है, जिन्होंने कौमार सर्ग में अवतार ग्रहण किया था। मार्ग: इनहोंने प्रजा विस्तार के बजाय निवृत्ति मार्ग (मोक्ष और आत्मज्ञान) को चुना और सदा भगवान विष्णु की भक्ति में निरत रहे। वैश्विक महत्व: इनहोंने ही उदासीन अखाड़ा की स्थापना की और पुराणों के अनुसार, इन्होंने भगवान हंस के अवतार से वेदों का ज्ञान प्राप्त कर इसे ऋषि नारद को प्रदान किया था। परिवार: कुछ ग्रंथों में सनतकुमार और सनतसुजान को अलग मानकर पांच मानस पुत्रों का उल्लेख भी मिलता है, लेकिन चार ही प्रमुख हैं।

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