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*अमृत कलश* *"भक्त और भगवान"* 〰️〰️〰️♦️♦️〰️〰️〰️ *✡️अब श्री कृष्ण भगवान शरीर पोषण के लिए कर्म करने का औचित्य कहते हैं कि-* *सभी प्राणी अन्न से उत्पन्न होते हैं। शरीर अन्न से बनता है‌। इस शरीर का पोषण भी अन्न से ही होता है। जो कुछ हम खाते हैं, उसे अन्न कहते हैं। अन्न उत्पादन के लिए वर्षा की आवश्यकता होती है। अच्छी वर्षा के लिए यज्ञ करना पड़ता है। यज्ञ संपन्न करने के लिए कर्म करना पड़ता है। कर्म करने का ज्ञान वेद- विज्ञान से मिलता है। वेद-विज्ञान का ज्ञान परमात्मा से प्राप्त होता है। इसलिए सर्वव्यापी- सर्वगत परम ब्रह्म परमात्मा नित्य यज्ञ रूप कर्म में प्रतिष्ठित हैं। अतः हम लोगों को परमात्मा की प्रसन्नता के लिए और अपने कल्याण के लिए, शरीर पोषण के लिए सदैव कर्म करते रहना चाहिए। कर्म न करने पर संसार नहीं चलेगा और अपना जीवन निर्वाह भी नहीं होगा। जैसे अच्छी वर्षा के लिए वृक्ष लगाना अति आवश्यक है। बिना वृक्ष के अच्छी वर्षा नहीं होती। वृक्ष लगाने के लिए कर्म करना पड़ेगा। बिना कर्म किए वृक्ष लगाने का कार्य नहीं होगा। इसलिए यज्ञ भाव से अर्थात् परोपकार भाव से और संसार चलाने के लिए कर्म करना अपरिहार्य है। यह संपूर्ण जगत परस्पर-एक दूसरे पर निर्भर है, एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। यही कहने का आशय है।* *जो परमात्मा की बनायी हुयी इस वैज्ञानिक व्यवस्था का पालन करके कर्म करता है, वह मनुष्य प्रशंसा का पात्र है। इसके विपरीत जो इस वैज्ञानिक व्यवस्था की निंदा करता है, उसका जीवन व्यर्थ है। कार्य न करने वाला मनुष्य पापी है। उसकी संपूर्ण आयु व्यर्थ है। इसलिए कामचोर मनुष्य निंदनीय है और दंड का पात्र है। "मोघं पार्थ स जीवति"। अर्थात् उसका जीना धिक्कार है।* *अब श्री कृष्ण भगवान परमात्मा को प्राप्त हुए सिद्ध महात्मा योगियों के विषय में कहते हैं कि* *जो परमात्मा में ही रति वाला है, जो परमात्मा से प्राप्त परमानंद से तृप्त रहता है, जो परमात्मा का ध्यान पूजन भक्ति करके संतुष्ट रहता है,उस योग सिद्ध पुरुष के लिए कोई अनिवार्य कर्म करना शेष नहीं बचता है। जो परम सिद्धि प्राप्त करके गुणातीत भगवत् स्वरूप में स्थित हो चुका है, उसको अब कुछ प्राप्त करना शेष नहीं है। इसलिए उसका कुछ कर्तव्य- करने योग्य कर्म करना शेष नहीं बचा है।* *परम गति प्राप्त किए हुए जीवन् मुक्त महात्मा को इस संसार से कुछ नहीं चाहिए। इसलिए उसे कुछ प्राप्त करने का प्रयोजन समाप्त हो जाता है। यदि वह कोई कर्म करता है तो भी उससे उसे कोई लाभ नहीं है। अगर वह कोई कर्म नहीं करता है तो भी उसे कोई हानि नहीं है। क्योंकि उसे जो प्राप्त करना था, उस परम गति को वह प्राप्त करके भगवत स्वरूप में सदा के लिए स्थित होकर अक्षय आनंद का सेवन करता है।अब उसे सब प्राणियों से कुछ लेना-देना नहीं है। इसलिए यदि ऐसे सिद्ध महात्मा कोई कार्य न करें तो उनको कोई दोष नहीं लगता। क्योंकि वह अपना कार्य करके कृतकृत्य हो चुका है। उनके जन्म लेने का और जीवन का प्रयोजन पूर्ण हो चुका है-..!!!* शुभ रात्रि विश्राम जी 🌺🌺🥀 बाबा महाँकाल की कृपा सदैव आप सभी पर बनी रहे। 🙏🙏🌺🥀🥀🌺जय श्री महाकाल 🥀🥀🥀🥀 *🌲 जय माता दी 🌲🙏*

Comments (4)

Sanjay  Ahlawat

Sanjay Ahlawat

Jan 6, 2026

बहुत खूब धन्यवाद सुप्रभात आपका दिन मंगलमय हो

H.S.CHAHAR

H.S.CHAHAR

Jan 6, 2026

🙏🌹मंगलवार सुबह की 🙏 राम राम जी 🙏🌹जय बजरंगबली भगवान आपकी हर मनोकामना पूरी करें आपका दिन मंगलमय हो 🙏🌹जय श्री राम 🙏🌹 जय बजरंगबली 🙏🌹

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Jan 5, 2026

radhe radhe🌹🌹🙏 shubh ratri vandan behana🤗❤

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jan 5, 2026

राधे राधे जी 🌹🙏🌹शुभ रात्री वंदन मेरी बहन 🌺 आपका आने वाला कल शुभ एवं मंगलमय हो मेरी प्यारी बहन 🙏