
Rama Devi Sahu
206 days ago
🙏 धर्म की रक्षा के लिए जब भगवान विष्णु को भी करना पड़ा 'छल'! 🙏 ब्रह्मा जी जन्मदाता हैं और शिव जी संहारक, लेकिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु हैं। जब-जब धर्म और भक्तों पर संकट आया, तब-तब विष्णु जी ने मर्यादा से हटकर कुछ ऐसे कार्य किए जिन्हें "जनकल्याण के लिए किया गया छल" कहा गया। जानिये वो 5 प्रमुख घटनाएं जब श्रीहरि ने अपनी 'माया' से संसार को बचाया: 1️⃣ भस्मासुर का अंत: 🔥 जब शिवजी के वरदान से शक्तिशाली होकर भस्मासुर उन्हीं को भस्म करने दौड़ा, तब विष्णुजी ने मोहिनी रूप धारण किया। उन्होंने भस्मासुर को नृत्य में उलझाकर उसी का हाथ उसी के सिर पर रखवाकर उसे भस्म कर दिया। 2️⃣ वृंदा और जलंधर: 🌿 जलंधर असुर अजेय था क्योंकि उसकी पत्नी वृंदा का सतीत्व उसकी ढाल था। देवताओं की रक्षा के लिए विष्णुजी ने जलंधर का रूप धरकर वृंदा का सतीत्व खंडित किया, तब जाकर शिवजी जलंधर का वध कर पाए। वृंदा के श्राप से ही विष्णुजी शालिग्राम बने और वृंदा तुलसी। 3️⃣ समुद्र मंथन और अमृत: 🍯 समुद्र मंथन से निकले अमृत को जब दैत्य छीन ले गए, तब विष्णुजी ने फिर मोहिनी रूप धरा। उन्होंने दैत्यों को अपनी सुंदरता में उलझाकर सारा अमृत देवताओं को पिला दिया और स्वर्ग की रक्षा की। 4️⃣ वामन अवतार और राजा बलि: 👣 राजा बलि दानी थे पर उनमें अहंकार आ गया था। विष्णुजी ने वामन अवतार लेकर तीन पग भूमि मांगी। दो पग में धरती-आकाश नाप लिया और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल भेज दिया, जहाँ वे स्वयं उसके द्वारपाल बने। 5️⃣ बद्रीनाथ धाम की कथा: 🏔️ बद्रीनाथ पहले शिव-पार्वती का निवास था। विष्णुजी को यह स्थान भा गया। उन्होंने एक रोते हुए बालक का रूप धरा। माता पार्वती उन्हें चुप कराने अंदर ले गईं। मौका पाकर विष्णुजी ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और वह स्थान मांग लिया। तब शिवजी केदारनाथ चले गए। सार: भगवान का हर कार्य, चाहे वह 'छल' ही क्यों न लगे, अंततः लोक कल्याण और धर्म की स्थापना के लिए ही होता है। 🙌 जय श्री हरि विष्णु! 🕉️✨

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