
Rama Devi Sahu
2 hours ago
🌺 संकष्टी चतुर्थी व्रत का महा-चमत्कार: जब अनजाने में लिए गए 'गणेश' नाम ने तार दिया एक पापिनी को! 🐘✨ पुराणों में श्री गणेश के 'संकष्टी चतुर्थी व्रत' की महिमा अत्यंत अद्भुत बताई गई है। यह व्रत इतना प्रभावशाली है कि यदि कोई इसे अनजाने में भी कर ले, तो उसके जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। आइए पढ़ते हैं कुष्ठ रोग से पीड़ित एक चाण्डाली के उद्धार की यह रोंगटे खड़े कर देने वाली कथा...👇 स्वस्ति श्रीगणनायक गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदम् । बल्लालं मुरुडं विनायकमढं चिन्तामणिं थेवरम् ॥ ✨ राजा शूरसेन के दूत और एक अद्भुत दृश्य एक बार देवराज इन्द्र का दिव्य विमान किसी कारणवश राजा शूरसेन के नगर में आकर रुक गया (गिर पड़ा)। उसे पुनः उड़ाने के लिए इन्द्रदेव ने कहा कि यदि कोई 'संकष्टी चतुर्थी' का व्रत करने वाला अपना पुण्य दे, तभी यह विमान उड़ेगा। राजा के दूत ऐसे व्यक्ति की खोज में निकले। तभी उन्होंने एक अद्भुत दृश्य देखा— भगवान गणेश के दूत एक भयानक कुष्ठ रोग से पीड़ित, मलिन और दुर्गन्धयुक्त चाण्डाली को एक सुंदर विमान में बिठाकर स्वर्ग ले जा रहे थे! 🔥 कौन थी वह चाण्डाली? (पूर्व जन्म का पाप) आश्चर्यचकित राजदूतों के पूछने पर गणेशजी के दूतों ने बताया कि पूर्व जन्म में यह बंगाल की 'सुन्दरा' नामक अत्यंत रूपवान स्त्री थी। परंतु वह कुमार्ग पर चल पड़ी। एक रात जब उसके पति ने उसे रोका, तो उसने क्रूरता से अपने पति की हत्या कर दी। राजा द्वारा उसे मृत्युदंड मिला और वह भयंकर नरक की यातनाएं सहने के बाद इस जन्म में एक गरीब, बीमार और कुरूप चाण्डाली बनी। 🌙 कैसे हुआ इस पापिनी का उद्धार? गणेश दूतों ने बताया: "एक दिन यह चाण्डाली भूख से तड़प रही थी। यह भिक्षा मांगने एक ऐसे घर गई, जहाँ 'संकष्ट चतुर्थी' का व्रत रखा जा रहा था। उसे वहाँ से जो अन्न मिला, उसे उसने चन्द्रोदय होने के बाद खाया और दैवयोग से उसके मुख से 'गणेश' नाम निकल गया। अनजाने में ही सही, पर उससे संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण हो गया। इसी पुण्य के प्रताप से गणाधिपति श्री गणेश ने इसे ले जाने के लिए अपना विमान भेजा है।" 🌸 व्रत के पुण्य का महा-चमत्कार विमान में बैठते ही वह कुरूप चाण्डाली दिव्य कांति और वस्त्राभूषणों से युक्त एक सुंदर देवी में परिवर्तित हो गई। जब श्री गणेश के दूत उसे लेकर आकाश मार्ग से जा रहे थे, तब उस चाण्डाली के विमान की हवा के स्पर्श मात्र से देवराज इन्द्र का रुका हुआ विमान भी ऊपर की ओर उठकर अपने लोक (अमरावती) की ओर उड़ चला! ✨ फलश्रुति: जो भी मनुष्य संकष्ट-नाशक श्री गणेश के इस वृत्तांत को सच्चे मन से सुनता है या दूसरों को सुनाता है, बप्पा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और हर संकट को हर लेते हैं। परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं, सदा तं गणेशं नमामो भजामः ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ॥ श्री गणेशाय नमः ॥

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