MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

10 days ago

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 20 अगस्त 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - अष्टमी रात्रि 09:18 तक तत्पश्चात् नवमी* *⛅नक्षत्र -‌ विशाखा सुबह 09:08 तक तत्पश्चात् अनुराधा* *⛅योग - इन्द्र प्रातः 04:25 अगस्त 21 तक तत्पश्चात् वैधृति* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:06 से दोपहर 03:43 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:05* *⛅सूर्यास्त - 06:55 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:36 से प्रातः 05:20 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:04 से दोपहर 12:56 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:08 से मध्यरात्रि 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक दुर्गाष्टमी, सर्वार्थसिद्धि योग (सुबह 09:08 से प्रातः 06:05 अगस्त 21 तक)* *🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🕉️ जीवसंसार वर्णन १, सर्ग २७१ 🕉️* *🔴 रामजी ने पूछा, हे भगवन्! जो सर्व ब्रह्म ही है तो नेति क्या है और नाना प्रकार के पदार्थ क्यों भासते हैं | तुम कहते हो कि जगत् संकल्प से रचित है तो हे भगवन्! ये जो पदार्थ असंख्यरूप हैं कि उनकी संज्ञा की नहीं जाती और इन पदार्थों का स्वभाव एक-एक का अचलरूप होकर कैसे स्थित है?* *🔴 सर्व देवताओं में सूर्य का प्रकाश क्यों अधिक है और एक ही सूर्य में दिन और रात्रि छोटे छोटे बड़े क्यों होते हैं, यह विचित्रता क्या है?* *🔴 वशिष्ठजी बोले, हे रामजी! शुद्ध चिन्मात्रसत्ता में अकस्मात् से जो आभास फुरा है उस आभास का नाम नेति है और सृष्टि भी आभासमात्र है किसी कारण करके नहीं उपजी | जिसके आश्रय आभास फुरता है वही वस्तु अधिष्ठान होती है, इससे जगत् सब ब्रह्मरूप है और चिन्मात्रसत्ता अपने आप स्थित है, न उदय होती है और न अस्त होती है वह परिणाम से रहित सदा अद्वैतरूप स्थित है और उसमें न जाग्रत् है, न स्वप्ना है और न सुषुप्ति है, तीनों अवस्था आभासमात्र हैं पर चैतन्यसत्ता में इनसे द्वैत नहीं बना, यह तीनों इसी का स्वभाव प्रकाशरूप है-इससे भिन्न कुछ नहीं |* *🔴 जैसे आकाश और शून्यता, वायु और निस्स्पन्द, अग्नि और उष्णता और कर्पूर और सुगन्ध में भेद नहीं , तैसे ही जाग्रदादिक जगत् और ब्रह्म में भेद नहीं |* *🔴 हे रामजी! शुद्ध चिन्मात्र में जो चित्तभाव हुआ है उसमें चैतन्य आभास फुरा है और उसमें जैसा संकल्प फुरा है तैसे ही स्थित हुआ है कि यह इस प्रकार हो और इतने काल रहे, उसी संकल्प निश्चय का नाम नेति है | जैसे आदि संकल्प दृढ़ हुआ है, तैसे ही अबतक पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश अपने अपने भाव में स्थित हैं और अपने स्वभाव को नहीं त्यागते जबतक उनकी नेति है तब तक तैसे ही जगत् सत्ता में स्थित है |* *🔴 हे रामजी! इसका नाम नेति है | जैसे आदि संकल्प धारा है तैसे ही स्थित है और वास्तव में आभासरूप है | अकस्मात् से यह आभास फुरा है सो किसी सूक्ष्म अणु में फुरा है | जैसे समुद्र के किसी स्थान में तरंग बुद्बुदे फुरते हैं, सम्पूर्ण समुद्र में नहीं फुरते, तैसे ही जहाँ संवेदन रूप जैसा फुरना होता है तैसे ही स्थित होता है सो नेति है |* *🔴 जैसे तरंग और बुद्बुदे समुद्र से भिन्न नहीं, तैसे ही नेति आत्मा से भिन्न नहीं | जैसे द्रवता से समुद्र में तरंग फुरते हैं , तैसे ही आत्मा में संवेदन करके नेति और जगत् जो फुरते हैं सो वही रूप है-आत्मा से भिन्न कुछ नहीं |* *🔴 जैसे किसी ने कहा कि चन्द्रमा का प्रकाश है सो चन्द्रमा और प्रकाश में भेद नहीं, तैसे ही आत्मा और जगत् में भेद नहीं | यह विश्व आत्मा का स्वभाव है जैसे एक ही काल का दिन, पक्ष, बार, मास, वर्ष, युग, कल्प इत्यादिक बहुत संज्ञा हैं परन्तु काल एक ही है, तैसे ही भिन्न भिन्न जगत् के नाम हैं सो सब ब्रह्म ही है |* *🔴 हे रामजी! जब संवेदन चित्तरूप होती है तब प्रथम शब्द तन्मात्रा फुरती है और उससे आकाश उपजता है जिसका स्वभाव शून्यता है, फिर जब उसने स्पर्शतन्मात्रा को चेता तब उससे इसमें वायु फुरा और वायु का स्पन्दस्वभाव है | फिर रूप तन्मात्रा को चेता तब उससे अग्नि प्रकट हुई जिसका उष्ण स्वभाव है |* *🔴 फिर रसतन्मात्रा को चेता तब उससे जल प्रकट हुआ जिसका द्रव स्वभाव है | फिर गन्ध तन्मात्रा को चेता त

Post media

Comments (11)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 20, 2026

*आज का मंत्र* ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। अर्थ- मैं भगवान श्रीहरि विष्णु, वासुदेव के दिव्य स्वरूप को नमन करता हूँ। 🙏

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Aug 20, 2026

jai shree shyam 🙏

Shah  🩷

Shah 🩷

Aug 20, 2026

धन्यवाद....🙏👌

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 20, 2026

*हमारा जीवन,* *अग्नि के समान है,* *यह हम पर* *निर्भर करता है,* *कि हम* *अपने इस जीवन को* *किस दिशा में ले कर जाते हैं।* *इंद्रियों के गुलाम* *होकर,* *विलासिताओं को* *गले लगाते हैं,* *बुराइयां अपनाते हैं,* *या जीवन का मूल्य* *समझ कर,* *इसे एक सही दिशा देते हैं...!!!* *क्यों न हम* *जीवन रूपी इस अग्नि में* *चंदन व कपूर* *प्रज्वलित कर* *सभी को* *प्रकाश व सुगंध दें....!!!* *शुभ प्रभात🌄🙏* 🌷😊

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 20, 2026

*हमारा जीवन,* *अग्नि के समान है,* *यह हम पर* *निर्भर करता है,* *कि हम* *अपने इस जीवन को* *किस दिशा में ले कर जाते हैं।* *इंद्रियों के गुलाम* *होकर,* *विलासिताओं को* *गले लगाते हैं,* *बुराइयां अपनाते हैं,* *या जीवन का मूल्य* *समझ कर,* *इसे एक सही दिशा देते हैं...!!!* *क्यों न हम* *जीवन रूपी इस अग्नि में* *चंदन व कपूर* *प्रज्वलित कर* *सभी को* *प्रकाश व सुगंध दें....!!!* *शुभ प्रभात🌄🙏* 🌷😊

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 20, 2026

जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ॐ भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🌹 आपको सुप्रभात वंदन 🙏 लक्ष्मी नारायण की कृपा आप सपरिवार पर सदा बनी रहे 🙏🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 20, 2026

*जीवन मेें ऐसी कोई भी मंजिल नहीं है, जहाँ* *पहुंचकर* *सारे संघर्ष समाप्त हो जाएं। हरेक उपलब्धि* *अपने साथ एक नई परीक्षा लेकर आती है।* सुबह की राम राम 🚩🚩🚩

सविता

सविता

Aug 20, 2026

om namah Narayana 🙏🌹 shubh prabhat vandan ji

प्रेम कुमार

प्रेम कुमार

Aug 20, 2026

🌹🌹 ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹🌹

Dilip

Dilip

Aug 20, 2026

ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः 🌺🙏