
Rama Devi Sahu
194 days ago
सुंदर कांड की रोचक प्रश्नोत्तरी 1 :- सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया? हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटांचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटांचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दुसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस काण्ड की सबसे प्रमुख घटना यहीं हुई थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकाण्ड रखा गया। 2 :- शुभ अवसरों पर सुंदरकाण्ड का पाठ क्यों? शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकाण्ड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। जबकि किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियाँ हों, कोई काम नहीं बन पा रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकाण्ड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकाण्ड करने की सलाह देते हैं। 3 :- सुंदरकाण्ड का पाठ विषेश रूप से क्यों किया जाता है? माना जाता हैं कि सुंदरकाण्ड के पाठ से हनुमानजी प्रशन्न होते हैं। सुंदरकाण्ड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकाण्ड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुखः दुर हो जाते हैं, इस काण्ड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता माता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकाण्ड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है। 4 :- सुंदरकाण्ड से क्यों मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ? वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड की कथा सबसे अलग है, संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरूषार्थ को दर्शाती है, सुंदरकाण्ड एक मात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का काण्ड है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला काण्ड है, सुंदरकाण्ड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है, किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है। 5 :- सुंदरकाण्ड से क्यों मिलता है धार्मिक लाभ? सुंदरकाण्ड के वर्णन से मिलता है धार्मिक लाभ, हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंगबली बहुत जल्दी प्रशन्न होने वाले देवता हैं, शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकाण्ड का पाठ करना है, सुंदरकाण्ड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो सुंदरकाण्ड के पाठ से दूर हो जाती है, यह एक श्रेष्ठ और सरल उपाय है, इसी वजह से काफी लोग सुंदरकाण्ड का पाठ नियमित रूप से करते हैं, हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए वहां सीता माता की खोज की, लंका को जलाया सीता माता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए, यह एक भक्त की जीत का काण्ड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है, सुंदरकाण्ड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं, इसलिए पुरी रामायण में सुंदरकाण्ड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है, इसी वजह से सुंदरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। ।। जय श्री राम ।।
Comments (4)

Rama Devi Sahu
Feb 18, 2026
Ji Shukriya 🌹 Ram Ram Jii 🙏 Good 😊 night 🌷🌷

Rama Devi Sahu
Feb 18, 2026
Aap ko bhi Bahut Bahut Dhanyawad ke Sath Subha Ratri Jii 🙏 Aap ka Jeevan ka Safar Kalyan or Mangalmay Ho 🙏 Sabse Pyara Baccha

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Feb 18, 2026
राम चरित मानस || के कुछ रोचक तथ्य 1 श्री राम जी लंका=111 दिन रहे 2 सीता जी लंका में = 335 दिन रही 3 मानस में श्लोको की संख्या 27 है 4 मानस में चौपाई की संख्या = 4608 5 मानस में दोहो की संख्या = 1074 6 मानस में सोरठो की संख्या = 207 7 मानस में छन्द की संख्या = 86 8 सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का 9 सीता जी रानी बनी = 33 वर्ष में 10 पुष्पक विमान की चाल = 400मी / घ 11 रामदल और रावण का युद्ध = 87 दिन 12 श्री राम और रावण का युद्ध = 32 दिन 13 राम सेतुः का निर्माण = 5 दिन में हुआ 14 = त्रिजटा के पिता = विभीषण थे जय श्री राम🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Feb 18, 2026
🙏 Ram Ram sundar rama यह जानकारी बेहद उपयोगी है। इसे साझा करने के लिए धन्यवाद! 😊
