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Rama Devi Sahu

451 days ago

🙏🌹 Jai Shree Krishna 🌹🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ।।श्रीहरिः।। *भाव के भूखे हैं भगवान* *उस समय कथावाचक व्यास डोंगरे जी का जमाना था बनारस में। वहां का समाज उनका बहुत सम्मान करता था। वो चलते थे तो एक काफिला साथ-साथ चलता था ।* *एक दिन वे दुर्गा मंदिर से दर्शन करके निकले तो एक कोने में बैठे ब्राह्मण पर दृष्टि पड़ी जो दुर्गा स्तुति पढ रहा था। वे उस ब्राह्मण के पास पहुंचे , जो कि पहनावे से ही निर्धन लग रहा था। डोंगरे जी ने उसको इक्कीस रुपये दिये और बताया कि वह अशुद्ध पाठ कर रहा है ! ब्राह्मण ने उनका धन्यवाद किया और सावधानी से पाठ करने की कोशिश में लग गया।* *रात में डोंगरे जी को जबर बुखार ने धर दबोचा। बनारस के नामी गिरामी डॉक्टर वहां पहुंच गए । भोर में सवा चार बजे उठ कर डोगरे जी बैठ गये , और तुरंत दुर्गा माता मंदिर जाने की इच्छा प्रकट की। एक छोटी मोटी भीड़ साथ लिये डोंगरे जी मंदिर पहुंचे , वही ब्राह्मण अपने ठीहे पर बैठा पाठ कर रहा था । डोंगरे जी को उसने प्रणाम किया और बताया कि वह अब उनके बताये मुताबिक पाठ कर रहा है।* *वृद्ध कथावाचक ने सर इनकार में हिलाया , पंडित जी ! आपको विधि बताना हमारी भूल थी। घर जाते ही तेज बुखार ने धर दबोचा । फिर भगवती दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन दिये। वे क्रुद्ध थीं , बोलीं कि तू अपने काम से काम रखा कर। मंदिर पर हमारा वो भक्त कितने प्रेम और भाव से पाठ करता था। तू उसके दिमाग में शुद्ध पाठ का झंझट डाल आया ! अब उसका भाव लुप्त हो गया। वो रुक रुक कर सावधानीपूर्वक पढ रहा है। जा , और कह कि जैसे पढता था , बस वैसे ही पढे।”* *इतना कहते-कहते डोंगरे जी के आँसू बह निकले।रुंधे हुए गले से वे बोले ,”महाराज ! उमर बीत गयी पाठ करते , माँ की झलक न दिखी। कोई पुराना पुण्य जागा था कि जिससे आपके दर्शन हुये और जिसके लिये जगत जननी को स्वप्न में आना पड़ा !* *आपको कुछ सिखाने की हमारी हैसियत नहीं है। आप जैसे पाठ करते हो , करो। परंतु जब हम जैसे सामने पड़ जाए , तो आशीर्वाद का हाथ इस मदांध मूढ के सर पर रख देना !”* *भगवान के प्रति आपका भाव कैसा है ? प्रभु नीति नियम , विधि विधान , शुद्धोच्चारण के नहीं , पर भाव के भूखे हैं . गृहस्थी त्यागने या भगवा धारण करने की कतई आवश्यकता नहीं है . विरक्त संन्यासी बनना या तपस्या करना भी जरूरी नहीं है।* *बस प्रभु के प्रति कोई भी स्थिति परिस्थिति में भाव चाहिए। भक्ति में सरलता और भोलापन चाहिए। कर्माबाई , विदुरानी , नरसिंह महेता , रैदास , सूरदास , तुकाराम , मीराबाई आदि आदि संतों ने प्रभु को नियम मर्यादा तपस्या या मंत्रशुद्धि से नहीं अपितु भाव से पाया ! भक्त का भाव ही प्रभु को प्रिय है!*mujhe Maharaj ji ki katha ki pustak Bhagwat Rahasya tatha tatvarth Ramayan uplabdh Hai WhatsApp Karen 987325 1921 *जय श्री कृष्ण* *********** 🙏🙏

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