
Rama Devi Sahu
2 days ago
🌺 अहोई अष्टमी: एक माँ का पश्चाताप, अहोई माता की कृपा और संतान की मंगलकामना 1 नवंबर 2026 | अहोई अष्टमी विशेष ___________ भारतीय संस्कृति में कुछ पर्व ऐसे हैं, जिनका संबंध केवल पूजा-पाठ और व्रत से नहीं, बल्कि परिवार, ममता और भावनाओं से भी जुड़ा होता है। अहोई अष्टमी ऐसा ही एक पर्व है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला यह त्योहार विशेष रूप से माताओं को समर्पित है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना से अहोई माता का व्रत रखती हैं। _____________ अहोई अष्टमी से जुड़ी एक बेहद भावुक कथा प्रचलित है। पौराणिक परंपरा में सुनाई जाने वाली अहोई माता की व्रत-कथा के अनुसार, बहुत समय पहले एक साहूकार की पत्नी अपने सात पुत्रों के साथ रहती थी। दीपावली आने वाली थी, इसलिए वह घर की साफ-सफाई और लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने जंगल गई। वहां मिट्टी खोदते समय अनजाने में उसकी कुदाल एक सेही (कांटेदार जीव) की मांद में जा लगी और उसके एक शावक की मृत्यु हो गई। ____________ यह देखकर स्त्री बहुत दुखी हुई। उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था, लेकिन उसके हाथों एक निर्दोष जीव की जान चली गई थी। कुछ समय बाद उस सेही ने अपने बच्चों को मृत पाया और दुख तथा क्रोध में उस स्त्री को संतान-वियोग का श्राप दे दिया। ____________ कथा के अनुसार, इसके बाद उस स्त्री के सातों पुत्र एक-एक करके उससे बिछुड़ गए और घर में दुख छा गया। अपने बच्चों के वियोग में वह स्त्री बेहद व्याकुल रहने लगी। उसे बार-बार जंगल की वही घटना याद आती और वह अपनी भूल के लिए स्वयं को दोषी मानती। ______________ एक दिन अपनी पीड़ा किसी वृद्ध महिला को सुनाते हुए उसने अपनी पूरी व्यथा बताई। वृद्धा ने उसे अहोई भगवती की शरण में जाने, अपने किए का पश्चाताप करने और श्रद्धापूर्वक व्रत-पूजन करने की सलाह दी। _______________ उस स्त्री ने कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई माता का व्रत रखा। दीवार पर सेही और उसके बच्चों का चित्र बनाया, माता की पूजा की और अपने अनजाने में हुए अपराध के लिए क्षमा मांगी। उसने मन में संकल्प लिया कि आगे से किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाएगी। _______________ कथा के अनुसार, उसकी सच्ची श्रद्धा और पश्चाताप से प्रसन्न होकर अहोई माता ने उसे संतान के सुख का आशीर्वाद दिया और उसके सातों पुत्र सकुशल लौट आए। तभी से माताएं अपनी संतान की मंगलकामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखने लगीं। ________________ इस कथा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि स्त्री से अनजाने में हुई भूल का उसे जीवनभर पश्चाताप रहा। अहोई माता की आराधना के साथ इस कथा में हमें यह भाव भी मिलता है कि प्रकृति और दूसरे जीवों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। किसी भी जीव का जीवन महत्वहीन नहीं है। _______________ अहोई अष्टमी के दिन माताएं सुबह से व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं। पारंपरिक रूप से दीवार पर माता का चित्र बनाया जाता है, जिसमें सेही और उसके बच्चों का चित्रण भी होता है। कथा सुनी जाती है, आरती की जाती है और आकाश में तारे दिखाई देने पर उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। _____________ पहले यह व्रत मुख्य रूप से पुत्रों की लंबी आयु के लिए रखा जाता था, लेकिन आज माताएं अपनी बेटियों और बेटों, दोनों की सुख-समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामना से यह व्रत रखती हैं। _____________ मां का प्रेम किसी एक संतान के लिए नहीं होता। उसके लिए बेटा और बेटी दोनों समान होते हैं। संतान चाहे बेटा हो या बेटी, हर मां की प्रार्थना एक ही होती है कि उसकी संतान स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे और जीवन में आगे बढ़े। ______________ अहोई अष्टमी हमें केवल संतान के लिए प्रार्थना करना ही नहीं, बल्कि हर जीव के जीवन का सम्मान करना और अपनी गलतियों को स्वीकार करना भी सिखाती है। ______________ मां अहोई भगवती से यही प्रार्थना है कि सभी बच्चों के जीवन में सुख, स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहे। हर मां की गोद हरी-भरी रहे और हर परिवार में प्रेम और प्रसन्नता का वास हो। जय अहोई माता! 🙏🌺


Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 1, 2026
🌺🙏 अहोई अष्टमी के पावन अवसर पर अहोई माता और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। माता सभी संतानों को लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि प्रदान करें। ❤️

R k jangid phulera Jaipur
Nov 1, 2026
जय माता दी🚩🌹🙏 अहोई अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏 शुभ प्रभात 🙏
