
Preeti Jain
445 days ago
‼️"राजा शिवि" की कथा!‼️ पुरुवंशी नरेश शिवि उशीनगर देश के राजा थे। वे बड़े दयालु- परोपकारी शरण में आने वालों की रक्षा करने वाले एक धर्मात्मा राजा थे। इसके यहाँ से कोई पीड़ित, निराश नहीं लौटता था। इनकी सम्पत्ति परोपकार के लिए थी। इनकी भगवान से एकमात्र कामना थी कि मैं दुःख से पीड़ित प्राणियों की पीड़ा का सदा निवारण करता रहूँ। स्वर्ग में इन्द्र को राजा शिवि के धर्म-कर्म से इन्द्रासन छिनने का भय हुआ। उन्होंने राजा की परीक्षा लेने, और हो सके तो इन्हें धर्म मार्ग से हटाने के लिए अपने साथ अग्निदेव को लेकर उशीनगर को प्रस्थान किया। इन्द्र ने बाज का रूप धारण किया, अग्नि ने कबूतर का रूप बनाया। बाज ने कबूतर की पीछा किया। बाज के भय से डरता-कांपता कबूतर उड़ता हुआ आकर राजा शिवि की गोद में गिर पड़ा और इनके वस्त्रों में छिप गया। राजा उसे प्रेम से पुचकारने लगे। इतने में पीछा करता हुआ बाज वहाँ आ पहुँचा। बाज ने कहा–‘राजन ! मैं भूखा हूँ, यह कबूतर मेरा आहार है। इसे मुझे दे दीजिए और मुझ भूखे की प्राण रक्षा कीजिए।’ राजा ने कहा–‘यह कबूतर मेरी शरण में आया है। शरण में आये हुए की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। मैंने इसे अभयदान दिया है। मैं इसे किसी प्रकार तुमको नहीं सौंप सकता हूँ।’ बाज ने कहा–‘महाराज ! जहाँ शरणागत की रक्षा करना आपका धर्म है, वहीं किसी का आहार छीनना भी तो आपके लिए अधर्म है। यहाँ आपका धर्म है कि मुझ भूखे को आहार दें, अन्यथा मेरी हत्या का पाप आपको लगेगा। मर जाने के बाद मेरे बच्चे भी भूखे मरेंगे, उनकी हत्या का पाप भी आपको लगेगा। अतः आप इतना अधिक पाप न करें और मेरा आहार सौंप कर अपने धर्म का पालन करें।’ राजा ने कहा–‘मैं शरणागत को तुम्हें कदापि नहीं दे सकता। आहार के लिए इसके स्थान पर मैं अपना मांस तुम्हें देता हूँ। तुम भरपेट खा लो।’ बाज बोला–‘मैं मांसाहारी हूँ। कबूतर का मांस या अन्य मांस मेरे लिए समान है। आप चाहें तो कबूतर के बराबर अपना मांस मुझे दे सकते हैं। मुझे अधिक की आवश्यकता भी नहीं है।’ राजा को बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा–‘यह आपने बड़ी कृृपा की। आज इस नश्वर शरीर से अविनाशी धर्म की रक्षा हो रही है।’ राजधानी में कोलाहल मच गया। आज राजा एक कबूतर की प्राण रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस काटकर तराजू पर तोलने जा रहे हैं। यह देखने के लिए नगर की सारी प्रजा एकत्रित हो गयी। तराजू मंगाया गया। एक पलड़े में कबूतर को बैठाया गया और दूसरे पलड़े पर राजा ने अपने शरीर का मांस काट कर रखा। मांस कम पड़ा तो और काटना पड़ा। वह भी कम पड़ गया। इस प्रकार राजा अपने शरीर का मांस काट कर रखते गये और तराजू का पलड़ा हमेशा कबूतर की तरफ झुका रहा वह जैसे राजा का मांस पाकर अधिकाधिक और भारी होता जा रहा था। सारी प्रजा सांस रोक, भीगे आँसुओं के साथ यह दृृश्य देख रही थी। राजा को मुखमण्डल में तो तनिक भी शिकन नहीं थी। अन्त में राजा स्वयं तराजू के पलड़े पर बैठ गये। उसी समय आकाश से पुष्पवृष्ठि होने लगी। अन्तरिक्ष में प्रकाश व्याप्त हो गया। दोनो पक्षी अदृश्य हो गये। उनके स्थान पर इन्द्र और अग्नि सामने खड़े थे। सभी उन्हें आश्चर्यचकित हो देखने लगे। इन्द्र ने कहा–'महाराज ! आपकी परीक्षा के लिए मैंने बाज का और अग्निदेव ने कबूतर का रूप धारण किया था। आप तो सच्चे धर्मात्मा निकले। आप जैसे परोपकारी जगत की रक्षा के लिए ही जन्म लेते हैं।’ राजा शिवि तराजू से नीचे उतरे। उनका शरीर सामान्य हो चुका था। दोनो देवता अन्तर्धान हो गये। ----------:::×:::---------- 🙏 "जय जय श्री राधे"🙏 ****************

Comments (11)

Pannalal Chouhan
Jun 14, 2025
जय श्री राधे कृष्णा जी राधे राधे

Mayank S
Jun 13, 2025
Radhe Radhe ji 🙏

Ramesh Mathwas Nagda mp Ujjain Madhya Pradesh Nagda mp Ujjain Madhya Pradesh
Jun 12, 2025
Radhe Radhe ji Jai shree Krishna ji

Preeti Jain
Jun 12, 2025
ji thank you so much 🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Jun 12, 2025
शुभ गुरुवार ये शुभ दिन शुभफलदाई मंगलकारी रहे परम पूज्य पिता परमेश्वर शक्ति का आशीर्वाद कृपा सदेव आप और परिवार पर बना रहे उज्जवल भविष्य की शुभ कामनाएं करते हैं 🥀🌹🌹🌹 जय जिनेंद्र 🌹🌹🌹🙏

Rama Devi Sahu
Jun 12, 2025
Radhey Radhey Jii 🙏🌹🌹

Deepak karki
Jun 12, 2025
radhe shyam radhe shyam radhe krishna radhe radhe ji

Deepak karki
Jun 12, 2025
radhe shyam radhe krishna krishna krishna radhe radhe ji

प्रेम कुमार
Jun 12, 2025
🌹🌹 राधे राधे जी 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन आप का दिन मंगलमय हो 🌹🌹 जय जिनेंद्र

🙏Y.R Singh🙏
Jun 12, 2025
Radhey Radhey Radhey ji
