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आज के विचार “श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा-100” ( मल्लक्रीड़ा ) 11, 6, 2025 **************************************** कल तै आगै कौ प्रसंग - मैं मधुमंगल ......... एक घड़ी ही सोयौ होयगौ कन्हैया ...उठ गयौ । बलभद्र बोले ....इतनी जल्दी क्यों ? अभी तौ समय बहुत है घर लौटवे में कन्हैया ! और गैया हूँ अभी चर रही हैं ....लाला ! सो जा । बलराम फिर कन्हैया कूँ सुलानौं चाह रहे हैं । लेकिन ...... भैया ! अब नींद नही आय रही .....कन्हैया कूँ अब सोनो ही नही है ....वो अब उठ ही गए ....और अँगड़ाई लै वै लगे । तभी दूर ......श्रीदामा और मैं ( मधुमंगल ) हम दोनों यमुना के तट बालुका में मल्ल खेल रहे हैं । मधुमंगल ! कन्हैया ने मोकूँ आवाज़ दियौ तौ मैं बा माहूँ देखन लगौ तभी श्रीदामा ने उठाय के मोकूँ पछाड़ दियौ । धत्त ! ऐसे थोड़े ही होय ....मैंने श्रीदामा ते कही ....तब तक कन्हैया हूँ मेरे पास आय गयौ .....और कन्हैया के आते ही सारे ग्वाल बाल अब मेरे पास ही आय गए हे । तुम लोग कहा खेल रहे हो ? कन्हैया हमते पूछ रह्यो है ....मल्ल युद्ध सीख रहे हैं ....श्रीदामा ने कही । मोकूँ हूँ सीखनौं है .....कन्हैया ने कही । नही , कन्हैया ! तू मत खेल .....सुबल सखा कूँ जे प्रिय नही है मल्ल । और वैसे भी कन्हैया कौ श्रीअंग युद्ध करवे लायक थोड़े ही है ....कितने कोमल अंग हैं याके ! नही , मत खेल । सुबल सखा कूँ चिढ़ मचे जा जुद्ध कौ खेल खेलवे में ....काहूँ के हाथ पाँव टूट गए तौ ? कन्हैया ने सुबल ते धीरे कही .....इन सबकी तौ अभी छुट्टी करूँ ....सुबल ! तू देख । मेरी ओर देखके कन्हैया अब ताल ठोकवे लग्यो ........ मैं हूँ आगे बढ्यो और कन्हैया चित्त । ऐसे नही , ऐसे थोड़े ही होवे .......कन्हैया खिसियारो .....मैंने कही तौ कैसे होवे ? थोड़ी देर मल्ल युद्ध खेलें तौ ....तू तौ सीधे गिराय रो है । कन्हैया की बात सुनके मोकूँ बड़ी हँसी आयी .....कन्हैया मोते बोलो ....मधुमंगल ! मोकूँ सिखाय दे मल्ल । मैंने हँसते कही .....तौ जे कह ना ....कि तोपे अभी आबै ही नही है मल्ल लड़वौ । कन्हैया ने कही ...मोकूँ कहाँ आवै । अब तौ मैं ही गुरु बन गयौ .......वैसे मोते बढ़िया मल्ल दाऊ भैया जानें ....मैंने कन्हैया ते कही भी लेकिन सारौ माने नही है .....कह रो - दाऊ कूँ नही आवै .....मधुमंगल ! तू ही सिखा । अब तौ मोकूँ सिखानौं पड्यौ ........ यमुना की भूमि में ....जहां कोमल बालुका है ......कन्हैया और मैं .....बाकी सब ग्वाल सखा मल्ल खेल देखवे कूँ ठाढ़े हैं ...... पहले तौ तू सिखायेगौ ना ? कन्हैया की बात पे आज मोकूँ बहुत हँसी आय रही है ....जब जब मैं तैयारी करतौ , ताल ठोकतौ तभी कन्हैया डरके कहतौ .....तू सच्ची में तौ नाँय पटकेगौ ? मैंने कही बाते .....चिन्ता मत कर ...चोट नही लगेगी तेरे । मधुमंगल ! सम्भाल के ....लाला कोमल है ....सुबल सखा कह रो । कछु नही होयगौ कन्हैया कूँ .....तेरी तरह छोरी थोड़े ही है कन्हैया ....मैंने कही । देख रो है कन्हैया ! जे सारौ मधुमंगल मोकूँ छोरी कह रो है । अब मल्ल खेल आरम्भ भयौ .......... मैंने कही ...कन्हैया ! पहले अपनी धोती उठाय के घोंटू तक बाँध ....कन्हैया ने वही कियौ ....फिर अपने कुंतल केश कूँ पीछे माहूँ बाँध लियौ .....मेरी तरह कन्हैया ने ताल ठोक्यो.....लेकिन या बार हूँ .....मैंने कन्हैया कूँ चित्त । अबकन्हैया चिढ़ गयौ । मधुमंगल ! मोकूँ सिखा । फिर मैंने सिखायौ कि ...पहले पंजा मिला ...ऐसे ....फिर थोड़ौ मोड़के , सामने वारे कूँ टंगड़ी मारके ऐसे गिरा दे । मैंने तीन बार कन्हैया कूँ गिराय दियौ ......लेकिन या बार तौ कन्हैया सावधान हो ...पूरौ सावधान । मैं दाऊ भैया कूँ देख रह्यो ....दाऊ भैया मेरे पास आय के बताय रहे ...मल्ल कौ दांव पेंच ....तभी कन्हैया पीछे तै आयौ और मेरे पाँमन्ने पकड़ के मोकूँ गिराय दियौ .....अब तौ स्वयं विजयी । कोई कहे या न कहे .....मैंने मधुमंगल कूँ गिराय दिए ......मैं जीत गयौ .....अब सब ग्वाल सखा हूँ ताली बजा रहे । मैंने कन्हैया ते कही ..ऐसे नही होवे । मधुमंगल ! दाऊ भैया ते पूछ लै ..कन्हैया बोल्यो तौ मैंने कही ......तुम दोनों एक ही हो ...... तभी दूर ते हँसते भए दाऊ भैया बोले ...”कन्हैया जीत गयौ”। सोई मैंने कही ....”एक बेल के दो तूमरा” कल्लू बल्लु । मैं ग़ुस्सा है कै यमुना में जाय के बैठ गयौ हो ....इधर कन्हैया कौ विजय उत्सव चल रह्यो है । जय श्री राधे राधे राधे राधे राधे

Comments (2)

Deepak  karki

Deepak karki

Jun 16, 2025

🌹🙏shree krishna govind hare murari h math narayana basudavaya 🌹🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 16, 2025

Hare Krishna 🙏 Subha Sandhya Vandan 🙏🌹🌹