
Rama Devi Sahu
29 days ago
मेरे पास एक स्कूटी थी, बहुत दिनो से स्कूटी का उपयोग नही होने से, विचार आया Olx पे बेच दें, कीमत Rs 30000/- डाल दी। बहुत आफर आये 15 से 28 हजार तक। एक का 29000 का प्रस्ताव आया। उसे भी waiting में रखा। कल सुबह एक काल आया, उसने कहा-"मैडम नमस्कार 🙏 , आपकी गाड़ी का add देखा। पसंद भी आयी है। परंतु 30000 रुपए जमा करने का बहुत प्रयत्न किया, बड़ी मुश्किल से 24000 ही इकठ्ठा कर पाया हूँ। बेटा इंजिनियरिंग के अंतिम वर्ष में है। बहुत मेहनत किया है उसने। कभी पैदल, कभी साईकल, कभी बस, कभी किसी के साथ.... सोचा अंतिम वर्ष तो वह अपनी गाड़ी से ही जाये। आप कृपया स्कूटी मुझे ही दीजिएगा.... नयी गाड़ी मेरी हैसियत से बहुत ज्यादा है। थोड़ा समय दीजिए। मै पैसों का इंतजाम करता हूँ। मोबाइल बेच कर कुछ रुपये मिलेंगें। परंतु हाथ जोड़कर कर निवेदन है मैडम जी, मुझे ही दीजिएगा।" मैने औपचारिकता में मात्र Ok बोलकर फोन रख दिया। कुछ देर बाद मेरे मन मे कुछ विचार आये। वापस काल बैक किया और कहा "आप अपना मोबाइल मत बेचिए, कल सुबह केवल 24 हजार लेकर आईए, गाड़ी आप ही ले जाईए वह भी मात्र 24 में ही"। मेरे पास 29 हजार का प्रस्ताव होने पर भी 24 में किसी अपरिचित व्यक्ति को मै स्कूटी देने जा रही थी। सोचा उस परिवार में आज कितना आनंद हुआ होगा। कल उनके घर स्कूटी आएगी। और मुझे ज्यादा नुकसान भी नहीं हो रहा था। ईश्वर ने बहुत दिया है और सबसे बडा धन समाधान है जो कूट-कूटकर दिया है। अगली सुबह उसने कम से कम 6-7 बार फोन किया? "मैडम कितने बजे आऊ, आपका समय तो नही खराब होगा। पक्का लेने आऊं, बेटे को लेकर या अकेले आऊ। पर साहब गाडी किसी को और नही दीजिएगा।" वह 500, 200, 100, 50 के नोटों का संग्रह लेकर आया, मगर साथ में बेटा नहीं एक लड़की थी । नोट देखकर ऐसा लगा, पता नही कहां कहां से निकाल कर या मांग कर या इकठ्ठा कर यह पैसे लाया है। वह लड़की एकदम आतुरता और कृतज्ञता से स्कूटी को देख रही थी । मैने उसे दोनो चाबियां दी, हेलमेट और कागज दिये। लड़की गाड़ी पर विनम्रतापूर्वक हाथ फेर रही थी । फिर स्कूटी पर बैठ गयी , उसकी खुशी देखते ही बनती थी ।। उसने पैसे गिनने कहा, मैने कहा आप गिनकर ही लाये है, कोई दिक्कत नहीं। जब जाने लगे, तो मैने उन्हे 500 का एक नोट वापस करते हुए कहा , घर जाते समय मिठाई लेते जाइएगा। मेरी सोंच यह थी कि कही तेल के पैसे है या नही। और यदि है तो मिठाई और तेल दोनो इसमें आ जायेंगे। आँखों में कृतज्ञता के आंसु लिये उसने मुझसे अनुमति मांगी , मैं ने जाते हुए उससे पूछा कि ये बिटिया कौन है ? तो उसने उत्तर दिया कि यही तो मेरा बेटा है?.... उसने विदा ली और अपनी स्कूटी ले गया। जाते समय बहुत ही आतुरता और विनम्रता से झुककर अभिवादन किया। बार बार आभार व्यक्त किया । दोस्तों, जीवन में कुछ व्यवहार करते समय नफा नुकसान नहीं देखना चाहिए। आपके माध्यम से किसी को क्या? सच में कुछ आनंद प्राप्त हुआ यह देखना भी जरूरी होता है। अगर कहानी आपके दिल तक पहुंचने मे सफल रही हो तो शेयर जरूर करें 🙏
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