
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
65 days ago
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥ जब आवहिं स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥ तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥ लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥ समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी ॥ जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥ अद्भुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥ जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥ पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥ कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥ ॥ दोहा ॥ पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार । करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥ ॥इति श्री शनि चालीसा
Comments (2)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 26, 2026
राधे-राधे श्याम धन्यवाद बच्चा जल्द ही मिलते हैं 🙏

बरखा शर्मा
Jun 26, 2026
🍀🌹राधे राधे शुभ रात्रि जी 🌹🍀
